साइबर ठगों का नया पैंतरा सेक्सटॉर्शन एपिसोड से कर रहे ब्लैकमेलिंग

रिपोर्ट/- जयप्रकाश रावत संदेश महल समाचार

साइबर क्राइम अपराधी लगातार नए-नए पैंतरे आजमा कर लोगों की जेबें ढीली करने को विवश कर रहे हैं। ऑनलाइन दोस्ती और सेक्स के नाम पर क्राइम का मकड़जाल फैलता जा रहा है और लोग इसकी जद में आते जा रहे हैं। इन दिनों साइबर अपराधियों के फैलाए गए भ्रम जाल में फंसाकर सेक्सटॉर्शन का शिकार बन रहें हैं।

मॉडर्न लाइफ में इंटरनेट चैटिंग एक जुनून, एक जरूरत, एक स्टाइल बनता जा रहा है. चैंटिंग के दौरान पता ही नहीं चलता कि आप कब-कैसे दूसरे आदमी से एकदम खुल जाते हैं, उससे हर बात शेयर करने लगते हैं।जब पता चलता है तो बहुत देर हो चुकी होती है।इसी बात का फायदा साइबर अपराधी उठा रहे हैं। सेक्सटॉर्शन के जरिए लोगों को फंसाना और पैसा कमाना है इनका पेशा बन गया है। सेक्सटॉर्शन के शिकार लोगों की कोई उम्र सीमा नहीं है।एक तरफ जहां इसमें स्कूल-कॉलेज में पढ़ने वाले लड़के-लड़कियां शिकार होती हैं।वहीं कई बार 50-55 साल तक के लोग भी लड़कियों से दोस्ती बनाने के चक्कर में सेक्सटॉर्शन का शिकार हो जा रहे हैं। बदनामी और शर्म के चलते ऐसे मामले पुलिस के पास बहुत कम पहुंचते हैं। सेक्सटॉर्शन के मकड़जाल का गैंग अब उत्तर प्रदेश में भी पूरी तरह से सक्रिय हैं।

क्या है सेक्सटॉर्शन

मोबाइल या वेब कैम के जरिए किसी की सेक्स गतिविधि को रिकॉर्ड करना या किसी की बिना कपड़ों की तस्वीरों को शूट करके उसके जरिए ब्लैकमेल करने को सेक्सटॉर्शन कहा जाता है।

कैसे फंसते हैं लोग ?

साइबर अपराधी, फेसबुक, स्काइप या किसी दूसरे माध्यम का इस्तेमाल करके अपने शिकार को फंसाते हैं।इंटरनेट पर अपनी नकली पहचान बनाते हैं. फिर खूबसूरत लड़के-लड़कियों को हनी ट्रैप की तरह इस्तेमाल करके अपने शिकार से दोस्ती करवाते हैं। उन्हें बहुत करीब आने,दोस्ती बढ़ाने के लिए उकसाते हैं। धीरे-धीरे अपने शिकार को वेबकैम के सामने सेक्सुअल एक्ट करने, कपड़े बदलने और उतारने के लिए उकसाते हैं। हैरानी की बात तो यही है कि ज्यादातर लोग इनके चंगुल में फंस जाते हैं। यही कारण है कि इनके शिकार लोगों की संख्या बढ़ रही है। अपने शिकार को फंसाने के लिए इन्हें एक सप्ताह या फि महीनों का समय लग जाता है।गैंग बहुत ही प्रफेशनल तरीके से काम करते हैं।

सेक्सटॉर्शन के तरीके ?

सबसे अधिक फेसबुक के जरिए लोगों को फंसाया जा रहा है। इसके बाद स्काइप, लिंक्ड-इन, स्नैपचैट, इंस्टाग्राम का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। इंटरनेट पर दोस्ती पहले दोनों की रजामंदी से वेबकैम के सामने कपड़े बदलने, सेक्सुअल ऐक्ट करने का सिलसिला शुरू हो जाता है और बाद में यही एपिसोड ब्लैकमेलिंग में बदल जाता है। फिर तमाम तरह के ग्रुपों में वीडियो शेयर करने की धमकी देकर मोटी रकम वसूली जाती है। इससे बचने के लिए फेसबुक अकाउंट की प्राइवेसी सेटिंग्स को ‘पब्लिक’ के बजाय ‘फ्रेंड्स ओनली’ में बदलना ही बेहतर होगा। अपनी प्रोफ़ाइल को लॉक करना और भी सुरक्षित है क्योंकि आपके फ्रेंड लिस्ट के बाहर कोई भी आपकी फ़ोटो या डेटा तक उस तरह से नहीं पहुंच सकता है।इंटरनेट इस्तेमाल करते समय अपनी निजी जानकारी किसी अज्ञात व्यक्ति के साथ साझा न करें?अनजान लोगों से इंटरनेट पर बातचीत या ई-मेल का आदान-प्रदान न करें? आपकी जागरूकता ही,सुरक्षा एवं सतर्कता है।