आजकल अन्धो के शहर मे खूब बिक रहा आईना

जेपी रावत
संदेश महल समाचार

विद पावर कार्पोरेशन कर्मचारी संघ के प्रदेश ब्यापी हड़ताल से जनजीवन अस्त ब्यस्त हो गया था। गाँव से लेकर शहर तक अन्धेरा मे ङूब गया हर तरफ सरकार की बिफलता के कसीदे पढे जाने लगे।


चौबीस घंटों मे सफलता का झंडा बुलन्दी पा गया सियासी दलो की रणनिति फेल हो गयी। समझौते के बाद रात दस बजते बजते रूठी बिजली रानी मूस्कराते हुये आ गयी लोगो ने राहत की सांस लिया। रबिवार की रात से ही बिजली गुल हो गयी हर तरफ अफरा तफरी मच गयी थी।अन्धो के शहर मे आजकल आईना खूब बिक रहा है।अन्धो को भी सच्चाई पर झूठ का आवरण चढाकर बिषाक्त् रहनुमाई के लिये बिकृती भरा फार्मूला दिख रहा है।हर तरफ शोर है,सरकार निकम्मी है।शहंशाह चोर है।कुछ समाचार चैनलो में सारगर्भित शब्दों के माध्यम से झूठी फरेबी घटनाओ को भी बहादुरी के साथ कबरेज कर दिखाने की होड़ लगी है। यह लोकतन्त्र है जनाब,हिन्दुस्तान की सियासत मे एक नयी मिडिया वजूद मे आयी है। समाचारो का ठेका हो रहा है पब्लिक के साथ धोखा हो रहा है। गलत को सही सही को गलत दिखाने के लिये सौदा बाजी पक्का होते ही टीबी पर बिकाऊ एंकर भड़ैती शूरू कर दे रहे है।ऊब कर आजकल लोग टीबी देखना बन्द कर दिये है।जिसको भी सत्ता की चाहत है। सत्ता का ख्वाब पाल रखा है।अब निष्पक्ष पत्रकारिता की बात करना ही बेमानी है।वह पुराना जमाना लद गया अब पूजी पतियों के टीबी चैनलो पर वही दिखेगा जो खरीद्दार कहेगा?सरकार बनाना हो। सरकार गिराना हो हादसा छिपाना हो।देश मे दंगा भङकाना हो। छोटी घटना को भी बड़ा दिखाना हो इसके लिये बदनाम गली के कोठों पर बैठे सियासत के ठेकेदारों से सौदेबाज़ी करनी ही पड़ती है चारो तरफ शोर है।अब तो सारे दल टीबी चैनलो से सौदे बाजीकर रहे है चुनाव करीब है।इनका खुल गया।नसीब है।अभी एक हफ्ता पूर्व नजारा देखा होगा।हांफती चिल्लाती महीला पत्रकार को एंकरीग करते हुये।पुलिस वालो से ऊलझते हुये झूठी खबर को भी हाईलाईट करने के सौदेबाजी हो चुकी थी।टीबी को टीआरपी मिले न मिले लेकीन उसके मालिक के चेहरे पर चमक थी।इन्ही की देन है कि प्रदेश की सड़कों पर बर्षाती मेढको के तरह सियासी दलों के कार्यकर्ताओं ने धरना प्रदर्शन शूरू कर दिया?उनको पता भी नहीं मामला क्या है। बिकाऊ मिडिया ने भड़काऊ मैसेज और समाचार को फैलाकर गलत फोटो दिखाकर पूरे प्रदेश में अराजकता का माहौल पैदा कर दिया? दुर्घटना को संगीन घटना का जोड़ा जामा पहनाकर जिस तरह से प्रदेश के परिवेश को बिषाक्त करने की कोशिश की गयी वह निन्दनीय है।अकल्पनीय हैं।आनर क्लीनिंग का मामला उजागर हो गया? लेकीन सियासी दलो की हालत वही हो गयी है की एक गली का कुत्ता रात को अनायास ही भौकने लगा उसका सुनकर दुसरे गली का कुत्ता भी भौकने लगे देखते ही देखते सारे मुहल्ले के कुत्ते भौकने लगे। एक बुजूर्ग कुत्ते ने पूछा आखिर क्यों भौंक रहे हो तो एक भौंक रहा कुत्ता बोला पीछे वाला भौंक रहा था इस लिये हम भी भौक रहे है?आजकल सियासत मे भी यही हालत है।एक अकस्मात घटना हाथरस मे होती है और हाथरस से बनारस तक धरना प्रदर्शन शुरू हो गया।जगह जगह समाज के भीतर मर्यादा खो चुके दलों के लोग भी जो गुमनामी में जी रहे थे कुलाचे भरने लगे।हालात हलाहल बिष से बिषाक्त होने लगा।लेकिन सच की ईबारत समाज मे समर्पित होते ही सबके चेहरे उतर गये।अल्फाज बदल गये?वास्तविकता के धरातल पर कदम ताल करती ब्यवस्था में नहीं समाहित आस्था बर्तमान समय में बढ रही दुर्ब्यवस्था के कारण सशंकित जरूर हुयी है। लेकीन सब दिन जात न एक समान वाली बात चरितार्थ हो रही है।जिस अन्दाज में झूमकर पब्लिक ने ताज पोशी किया था।आज उसी रियासत में सियासत के तुगलकी फरमान से तबाही मच गयी है।यह अलग बात है दिन रात की सियासी बैठकों के बाद बिगड़े माहौल को सुधारने की कोशिश जारी है।सियासी दलो की जहरीली बयान बाजी टीबी चैनलो के गठजोड़ के कारण करोना से भी खतरनाक महामारी बन गया है। तूर्रा तो यह है कि बेरोजगार सङक पर है।कामगार बेकार होकर ठोकरे खा रहा है। कल कारखाना कल की बात होकर रह गया।सरकारी नौकरी की बात करना ही बेवकूफी है। कहीं पर भी कोई नियन्त्रण नही।भरष्टाचार अन्य सरकारो की अपेक्षा चौगुना बढ गया।रोजमर्रा की चीजो का दाम आसमान तक चढ गया।आखिर जाये तो जायें कहाँ? किसान तबाह है। ब्यापारी हताश है।शिक्षा का सर्वनाश हो गया।चारो तरफ बिनाश ही बिनाश ? सर्वनाश की ईबारत लिखती यह सदी योगी और मोदी के शासन की बिकृतियो का बखान करते हुये ऐतिहासिक उपलब्धियो के लिये सदियों सदियो तक जानी जायेगी?जैसे जैसे समय गुजर रहा है सियासी सूरज गर्मी बिखेरता आने वाले कल मे होने वाली तबाही की चेतावनी दे रहा है।जिस तरह से टी आर पी बटोरने के लिये दिन भर टीबी चैनल जहर उगल रहे है।वक्त टीबी चैनलो का गुलाम हो चुका है। समेकित ब्यवस्था मे बिकृतिभरा सन्देश जिस तरह परवरिश पा रही है। वह आने वाले कल के लिये शुभ सन्देश कत्तई नही है।बदलता परिवेश इस देश की सियासत मे केवल बिद्वेश लोगो के बीच क्लेश फैलाकर समावेश की संरचना पर प्रहार कर रहा है।

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