आत्मनिर्भता की ओर तेजी से बढ़ रहा है भारतः अरुण सिंह

रिपोर्ट /- प्रताप सिंह मथुरा संदेश महल समाचार आत्मनिर्भर भारत और पं. दीनदयाल उपाध्याय का एकात्म मानववाद’ विषय को लेकर संस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव, सांसद अरुण सिंह ने कहा कि भारत आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहा है। आत्मनिर्भरता का यह लक्ष्य पं.दीनदयाल उपाध्याय ने ही निर्धारित किया था। मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन से शुरू हुए इस सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव ने कहा कि भारत में इस समय विश्व के सबसे बड़े राजनीतिक दल की सरकार है और इसका नेतृत्व विश्व के सबसे लोक्रप्रिय व्यक्तित्व नरेंद्र मोदी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से भारत में अंधकार को मिटाकर देश की तस्वीर बदलना शुरू हुई। भारत आज पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। आज जब विश्वभर के देशों की आर्थिक व्यवस्था में मारामारी मची हुई है तो ऐसे में महत्वपूर्ण सवाल उठता है कि हम आत्मनिर्भर कैसे बनें। पंडित दीनदयाल उपाध्याय कहते थे कि हमारे देश की अर्थ व्यवस्था देश के अनुकूल होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब भारत पूरी तरह विदेशों पर निर्भर था। यहां तक कि हमारे यहां खाने को अनाज भी विदेश से आता था। लेकिन आज वह स्थिति नहीं है। आज का भारत बहुत से मामलों में सक्षम है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। आत्मनिर्भर भारत के पांच मजबूत स्तंभ हैं जिनपर काम हो रहा है, क्वांटम जंप, स्केल आफ स्पीड, सिस्टम इंप्रूवमेंट, प्राकृतिक ऊर्जा उत्पादन और मांग। हमने आर्थिक क्षेत्र में बहुत तेजी से तरक्की की है। आज हम विश्व की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर में तेजी से सुधार हो रहा है। सम्मेलन में मौजूद स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय संयोजक सतीश अग्रवाल ने अपने जोशीले वक्तव्य में स्वदेशी अपनाने का नारा देते हुए कहा कि महात्मा गांधी के बाद पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने स्वदेशी स्वावलंबन का विचार देश को दिया। 20वीं शताब्दी में भारत को दो महापुरुषों महात्मा गांधी और पं.दीनदयाल उपाध्याय ने प्रभावित किया। दोनों ही गैर राजनीतिक महापुरुष थे। उन्होंने कहा कि स्वदेशी अपनाकर ही देश आत्मनिर्भर बन सकता है। अंग्रेजों ने भारत को नौकरी का कंसेप्ट दिया। गुलामी के दौरान हमारे देश ने नौकरी को अच्छा माना जाने लगा वरना हमारे देश में तो चाकरी(नौकरी)करना सबसे तुच्छ माना जाता था। देश के 37 करोड़ युवाओं से ये उम्मीद की जाती है कि वे नौकरी के लिए नहीं नौकरी देने वाले उद्यमी बनें। आज हमारे यहां बड़ी तेजी से कंपनियां खड़ी हो रही हैं। उन्होंने कहा भारत में स्वदेशी का समय आ गया है क्योंकि भारत का समय आ गया है। प्रख्यात उद्योगपति पूरन डाबर ने सम्मेलन में मौजूद युवा विद्यार्थियों को अपना उदाहरण देते हुए उद्यमी बनने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि हमारे देश में सिर्फ एकात्म मानववाद ही सफल हो सकता है, जो देश के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचता है। उन्होंने प्रधानमंत्री के मेक इन इंडिया के नारे का हवाला देते हुए कहा कि सिर्फ इसके आधार पर ही देश आत्मनिर्भर बन सकता है। संस्कृति विवि के चांसलर सचिन गुप्ता ने कहा कि हमारे गावों में चलने वाले लघु उद्योगों को बढ़ावा देकर देश आत्मनिर्भर बन सकता है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को आइडिया खोजने चाहिए और उन आइडिया को कैच कर उसपर काम करने से देश तेजी से आगे बढ़ेगा। उन्होने कहा कि देश में कृषि के क्षेत्र में बहुत काम किया जा सकता है। उन्होने बताया कि संस्कृति विवि एग्री क्लीनिक खोलने जा रहा है, यहां नए स्टार्टअप और नए आइडिया पर काम करने के लिए बड़ी अनुदान राशि भी मिलेगी। सम्मेलन में मौजूद कलाकार, निर्देशक प्रकाश भारद्वाज ने कहा कि हमें वह करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पं. दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को लेकर एक अच्छी फिल्म बननी चाहिए। बीएसए के पूर्व प्रधानाचार्य, विभाग संचालक डा. वीरेंद्र मिश्रा ने पं.दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद पर विस्तार से प्रकाश डाला। संस्कृति स्कूल आफ एग्रीकल्चर के डीन डा. रजनीश त्यागी ने सम्मेलन के विषय और विस्तार के बारे में सभी को परिचित कराया। कार्यक्रम में संस्कृति विवि की विशेष कार्याधिकारी श्रीमती मीनाक्षी शर्मा, भाजपा के नेता प्रदीप गोस्वामी, चिंताहरण चतुर्वेदी, पुनीत चतुर्वेदी आदि मौजूद थे। संस्कृति विवि के कुलपति डा. तन्मय गोस्वामी ने स्वागत भाषण दिया। कार्यक्रम का कुशल संचालन संस्कृति विवि के प्लेसमेंट एंड ट्रेनिंग सेल की प्रभारी अनुजा गुप्ता ने किया।