जेपी रावत
संदेश महल समाचार
गणगौर पर्व राजस्थान सहित देश के कई।हिस्सों में हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है।यह पर्व चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया को भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना के रूप में मनाया जाता है। विवाहित महिलाएं अपने अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं, तो अविवाहित युवतियां मनचाहा वर पाने के लिए इस व्रत को करती हैं।
राजस्थान के जयपुर में गणगौर की विशेष शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें हाथी, घोड़े, ऊंट और पारंपरिक वेशभूषा में सजे-धजे बैंडबाजों के साथ श्रद्धालु शामिल हुए।शहरभर में गणगौर के गीत गूंजते रहे, और महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में गौर माता को विदाई देते हुए श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की।
इस पर्व के दौरान महिलाओं ने सोलह दिनों तक माता गौरी की पूजा कर सुख-समृद्धि की कामना की! खास बात यह रही कि इस बार युवतियों में भी इस पर्व को लेकर विशेष उत्साह देखा गया।कई स्थानों पर जल स्रोतों के पास महिलाएं पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ गणगौर पूजन करती नजर आईं।
गणगौर का यह पर्व आधुनिकता के दौर में भले ही संक्षिप्त होता जा रहा हो, लेकिन इसकी आस्था और महत्व में कोई कमी नहीं आई है! महिलाएं आज भी उसी श्रद्धा और भक्ति भाव से गणगौर माता की पूजा करती हैं, जैसे वर्षों से करती आ रही हैं।