पीएन सिंह
बाराबंकी संदेश महल
विकास खंड सूरतगंज की 103 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत कराए गए कार्यों का भुगतान समय से न होने के कारण हालात चिंताजनक होते जा रहे हैं। मजदूरी पर आश्रित गरीब परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। गांवों में बेचैनी है, मजदूर परेशान हैं और प्रधान स्वयं को असहाय महसूस कर रहे हैं।ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने भीषण ठंड और कठिन परिस्थितियों में काम किया, लेकिन कई सप्ताह बीत जाने के बाद भी उनके खातों में मजदूरी नहीं पहुंची। कुछ परिवारों ने बताया कि घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और दवाइयों तक के लिए पैसे नहीं हैं। बैंक और पंचायत कार्यालय के लगातार चक्कर लगाने से उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।प्रधानों का दर्द भी कम नहीं है। उनका कहना है कि मस्टर रोल प्रविष्टि, हाजिरी जॉब कार्ड सत्यापन सहित सभी औपचारिकताएं समय से पूरी कर दी गईं। इसके बावजूद फंड ट्रांसफर ऑर्डर (एफटीओ) लंबित होना तकनीकी स्वीकृति या माप पुस्तिका (एमबी) अपलोड में देरी जैसे कारणों से भुगतान अटका हुआ है। मजदूरों का आक्रोश सीधे पंचायत प्रतिनिधियों पर उतर रहा है, जिससे सामाजिक तनाव की स्थिति बन रही है।खंड विकास अधिकारी ने स्वीकार किया कि कुछ तकनीकी कारणों से भुगतान प्रभावित हुआ है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए हैं और आश्वासन दिया है कि जल्द ही मजदूरों के खातों में धनराशि भेजी जाएगी।ग्रामीणों और प्रधानों ने प्रशासन से अपील की है कि मनरेगा जैसी जीवनरेखा योजना में भुगतान की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और त्वरित बनाया जाए ताकि गरीब मजदूरों को समय पर उनका हक मिल सके और गांवों की आर्थिक धड़कन ठहरने से बच सके।