सर्वोच्च न्यायालय ने आवारा कुत्तों और आवारा पशुओं पर जारी किए कड़े निर्देश

नई दिल्ली संदेश महल
देशभर में आवारा कुत्तों और आवारा मवेशियों से बढ़ते जोखिम को देखते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि सार्वजनिक स्थानों को सुरक्षित रखना अब राज्यों की प्राथमिक ज़िम्मेदारी है।

पीठ ने आदेश दिया कि देश के सभी शैक्षिक संस्थानों, अस्पतालों, सार्वजनिक खेल परिसरों, बस स्टैंडों और रेलवे स्टेशनों पर आवारा कुत्तों के प्रवेश को रोकने के लिए उचित बाड़बंदी की जाए। स्थानीय निकायों को निर्देश दिया गया है कि वे पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2023 के तहत चिन्हित स्थानों से आवारा कुत्तों और पशुओं को नियमित रूप से उठाएं, उनका टीकाकरण व नसबंदी कर निर्धारित आश्रय स्थलों पर भेजें।

न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिव इन आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराएं। इसके साथ ही राजमार्गों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों से आवारा मवेशियों को हटाने पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि आवारा जानवरों की बढ़ती संख्या न केवल सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि सड़क हादसों और नागरिक असुरक्षा का बड़ा कारण भी बन रही है।