बच्छराजमऊ में हनुमान मंदिर बना आस्था विकास और पर्यावरण संरक्षण का प्रेरणाकेंद्र

पीएन सिंह
सूरतगंज, बाराबंकी संदेश महल
तहसील फतेहपुर क्षेत्र के ग्राम बच्छराजमऊ में स्थित प्राचीन हनुमान जी महाराज का मंदिर आज श्रद्धा, सेवा और समग्र विकास का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया है। ग्राम के पूरब दिशा में बाग के मध्य स्थित यह पावन स्थल अब केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं रह गया, बल्कि सामाजिक सहभागिता और पर्यावरण संरक्षण का भी प्रेरणास्रोत बन चुका है।करीब एक वर्ष पूर्व तक यह स्थल घने जंगल, झाड़ियों और वीरानी से घिरा हुआ था, जहां तक पहुंचना आमजन के लिए बेहद कठिन था। लेकिन आज वही स्थान स्वच्छता, शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण दिखाई देता है।मंदिर के पुजारी हरीसहाय दास के आगमन के बाद महज आठ महीनों में इस पावन धाम की तस्वीर पूरी तरह बदल गई। निरंतर साधना, पूजा-पाठ, हवन और तपस्या में लीन रहकर महंत जी न केवल धार्मिक गतिविधियों को सुदृढ़ कर रहे हैं, बल्कि मंदिर परिसर की नियमित देखरेख भी स्वयं कर रहे हैं।पर्यावरण संरक्षण को विशेष प्राथमिकता देते हुए मंदिर परिसर में व्यापक स्तर पर पौधरोपण कराया गया है। आम के वृक्षों के तनों पर चूना लगाकर स्वच्छता और वृक्ष संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है, जो ग्रामीणों के लिए प्रेरणादायक बन रहा है।इसी क्रम में ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के फतेहपुर तहसील अध्यक्ष प्रेम नारायण सिंह ने मंदिर पहुंचकर पुजारी को पुष्प भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया। तहसील अध्यक्ष बनने के उपलक्ष्य में मंदिर के पुजारी द्वारा उन्हें शुभकामनाएं भी दी गईं।पूर्व में मंदिर की सेवा कर रहे मौनी दास बाबा के देहांत के पश्चात पप्पू दास जी ने इस पावन स्थल की जिम्मेदारी संभाली। मौनी दास बाबा की स्मृति को चिरस्थायी बनाए रखने के उद्देश्य से उनकी समाधि स्थल का भव्य निर्माण कराया गया है, जिसमें पिलर खड़े कर छत निर्माण कार्य भी पूर्ण किया गया है।हनुमान जी महाराज की महिमा के कारण पहले श्रद्धालु कठिन रास्तों और झाड़ियों के बीच से होकर मंदिर पहुंचते थे, लेकिन अब चकरोड निर्माण पूर्ण होने से आवागमन सुगम हो गया है। इसके परिणामस्वरूप श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है।मंदिर परिसर में विकास कार्य निरंतर जारी हैं। इसी कड़ी में ग्राम सफीपुर निवासी फकीरे लाल पुत्र मनीराम (उम्र लगभग 66 वर्ष) द्वारा अपने निजी सहयोग से समाधि स्थल पर निर्माण कार्य कराया गया, जिससे ग्रामीणों में सेवा भाव, उत्साह और सहभागिता की भावना और अधिक प्रबल हुई है।आज यह स्थल केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक सहयोग और सेवा भावना का सशक्त उदाहरण बन चुका है। मंदिर परिसर को और अधिक आकर्षक एवं सुव्यवस्थित बनाने के लिए फूल-पौधों का रोपण, सौंदर्यीकरण और अन्य विकास कार्य निरंतर प्रगति पर हैं।