गोरखपुर संदेश महल समाचार
सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) प्रशिक्षण केंद्र, गोरखपुर में सोमवार को आयोजित भव्य दीक्षांत समारोह में देशभक्ति का अद्भुत नज़ारा देखने को मिला। 44 हफ्तों की कठिन और अनुशासित ट्रेनिंग पूरी करने के बाद विभिन्न राज्यों से आए 28 प्रशिक्षु जवान अब देश की सीमाओं की रक्षा में तैनात होंगे। इस अवसर पर आयोजित पीपिंग सेरेमनी में जवानों के परिजनों ने स्वयं उनके कंधों पर रैंक लगाकर उन्हें सम्मानित किया। जैसे ही बेटे और भाइयों की वर्दी पर नए सितारे जड़े गए, परिवारजनों की आंखें गर्व और खुशी से नम हो गईं।
युद्धकला का प्रदर्शन बना आकर्षण
समारोह के दौरान प्रशिक्षुओं ने युद्ध कला बैटल क्राफ्ट, फील्ड क्राफ्ट और आधुनिक युद्धक तकनीकों का प्रदर्शन कर उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी संगठित चाल, सधे हुए कदम और गर्जना से मैदान गूंज उठा। समारोह स्थल पर मौजूद लोगों ने इस दौरान कई बार तालियों की गड़गड़ाहट से जवानों का उत्साहवर्धन किया।
नए हेड कांस्टेबलों की टुकड़ी तैयार
ट्रेनिंग सेंटर के डीआईजी असेम हेमोचन्द्रा ने बताया कि 28 प्रशिक्षुओं में से कई को हेड कांस्टेबल के रूप में तैनाती दी गई है। उन्होंने कहा, “जवानों को केवल युद्ध कौशल ही नहीं, बल्कि समाज सेवा और सांस्कृतिक गतिविधियों की भी शिक्षा दी गई है। यह नई टोली एसएसबी की ताकत बढ़ाएगी और सीमा सुरक्षा को और मजबूत बनाएगी।
सीमा पर नई ऊर्जा का संचार
एसएसबी सेक्टर के डीआईजी मुन्ना सिंह ने पासिंग आउट परेड को संबोधित करते हुए कहा कि इंडो-नेपाल बॉर्डर खुला होने के कारण सुरक्षा की चुनौतियां अधिक हैं। “हम आपसी सहयोग और इंटेलिजेंस के माध्यम से सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। नए जवान अब संविधान की शपथ लेकर सीमा प्रहरी बन गए हैं और वे देश की सुरक्षा में पूरी तरह समर्पित रहेंगे।
देश सेवा का संकल्प
समारोह के दौरान जवानों ने हाथ उठाकर संविधान और राष्ट्र की रक्षा का संकल्प लिया। उनकी गूंजती हुई शपथ से वातावरण गूंज उठा। प्रशिक्षुओं के चेहरे पर गर्व और आत्मविश्वास साफ झलक रहा था।
गर्वित परिवारों की भावनाए
इस अवसर पर समारोह स्थल पर मौजूद जवानों के परिजनों ने कहा कि यह क्षण उनके लिए जीवन का सबसे बड़ा गौरव है। किसी ने बेटे को, किसी ने भाई को और किसी ने पति को देश सेवा की शपथ लेते देखा। पीपिंग सेरेमनी के दौरान भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा, लेकिन हर किसी की आंखों में सिर्फ एक ही चमक थी—देशभक्ति की।