बाराबंकी की मिट्टी से जुड़ी थी खामेनेई की विरासत मौत की खबर से सदमे में यह गांव

बाराबंकी संदेश महल
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली ख़ामेनेई के निधन की खबर के बाद सिरौलीगौसपुर क्षेत्र के किंतूर गांव में हलचल बढ़ गई है। इंटरनेट मीडिया पर खबर प्रसारित होते ही गांव के लोगों में शोक और भावनात्मक माहौल देखने को मिला। ग्रामीणों ने ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों और आम लोगों की सलामती के लिए दुआ की।किंतूर गांव का नाम इसलिए चर्चा में है क्योंकि स्थानीय परिवारों के अनुसार ईरान की इस्लामी क्रांति के नेता रुहोल्लाह खुमैनी के पूर्वजों का संबंध इसी गांव से रहा है। बताया जाता है कि उनके दादा सैयद अहमद मुसवी अवधी क्षेत्र से जुड़े थे और बाद में ईरान के खुमैन शहर जाकर बस गए। वहीं से परिवार के नाम के साथ ‘खुमैनी’ जुड़ गया।ग्रामीणों का कहना है कि किंतूर में कभी ‘सैयदवाड़ा’ के नाम से सैकड़ों घर आबाद थे। समय के साथ अधिकांश परिवार अन्य स्थानों पर चले गए और अब यहां कुछ ही घर शेष हैं। बावजूद इसके, गांव में इस वंश का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है।स्थानीय लोगों ने अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर चिंता जताते हुए शांति की अपील की है। उनका कहना है कि भारत और ईरान के बीच ऐतिहासिक सांस्कृतिक संबंध रहे हैं, ऐसे में मौजूदा परिस्थितियों में संयम और सद्भाव जरूरी है।उधर, क्षेत्र में दिनभर इस मुद्दे को लेकर चर्चाओं का दौर चलता रहा। हालांकि प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।