सड़क सुरक्षा माह में दिखावा, कार्रवाई दुपहिया तक सीमित

बाराबंकी संदेश महल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर पूरे प्रदेश में सड़क सुरक्षा माह मनाया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट तस्वीर पेश कर रही है। यातायात पुलिस की तथाकथित सख्ती महज दुपहिया वाहनों तक सिमट कर रह गई है। हेलमेट और ओवरलोडिंग की औपचारिक जांच कर जिम्मेदारी की इतिश्री कर ली जाती है, जबकि सड़क पर फर्राटा भर रहे चौपहिया वाहन लगभग जांच से बाहर दिखाई दे रहे हैं।हैरानी की बात यह है कि बड़ी संख्या में चौपहिया वाहनों पर एडवोकेट, हाईकोर्ट, उच्च न्यायालय, मजिस्ट्रेट, प्रेस और पुलिस जैसे शब्द लिखे होते हैं या फिर लाल-नीली पट्टी लगी रहती है। इन्हीं गाड़ियों का खुलेआम दुरुपयोग किया जा रहा है। नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए इन्हें तीर्थ यात्राओं, बारातों, दूल्हे की सवारी और सैर-सपाटे तक में बेधड़क इस्तेमाल किया जा रहा है।नियम स्पष्ट हैं कि बुकिंग पर चलने वाले चार पहिया वाहनों का पंजीकरण व्यावसायिक श्रेणी में होना अनिवार्य है और निर्धारित शुल्क भी जमा किया जाना चाहिए। इसके बावजूद निजी पंजीकरण वाले वाहन व्यावसायिक उपयोग में लाकर परिवहन विभाग को भारी राजस्व की चपत लगाई जा रही है। सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी इस अवैध गतिविधि से अनजान हैं या जानबूझकर आंखों पर पट्टी बांधे बैठे हैं?स्थिति यहीं तक सीमित नहीं है। जिला मुख्यालय पर कलेक्ट्रेट-कचहरी से लेकर उपनिबंधक कार्यालय तक सड़क के दोनों ओर अवैध रूप से खड़े चौपहिया वाहन जाम की स्थायी वजह बने हुए हैं। आमजन घंटों जाम में फंसकर परेशान होता है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर चुप्पी छाई रहती है।
सड़क सुरक्षा माह यदि केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगा और कार्रवाई चयनात्मक होगी, तो इसके उद्देश्य पर ही सवाल खड़े होना लाजमी है। जरूरत इस बात की है कि यातायात नियमों का पालन नाम, पद और पहचान से ऊपर उठकर समान रूप से कराया जाए, अन्यथा सड़क सुरक्षा माह महज एक सरकारी रस्म बनकर रह जाएगा।