आखिर ऐसा क्या है? जो यूपी के इस गांव के लिए खास बना फ्रांसीसी परिवार

रिपोर्ट
जेपी रावत
महाराजगंज संदेश महल समाचार

है थोड़ी दूर अभी सपनों का नगर अपना
मुसाफ़िरो अभी बाक़ी है कुछ सफ़र अपना

जावेद अख़्तर साहब के इन चंद् अल्फाज़ो में कितनी कशिश है,कितनी वास्तविकता, कितनी सच्चाई है,हकीकत को बेदाग तरीके से कोरे कागज पर उकेर दिया गया है,…..बाक़ी है कुछ सफ़र अपना?
गांव में रुके एक फ्रांसीसी परिवार जो गांव की सोंधी मिट्टी की महक, गुजारें दिन, तमाम यादों को समेटकर अपने वतन की वापसी की तैयारी में है। जो बहुत सी यादों को ले कर जा रहा है और बहुत सी यादों को छोड़कर कर? क्योंकि अभी बाकी है,कुछ सफर इनका?

बताते चलें कि खूबसूरत वादियों के दीदार के लिए देश और दुनिया से सैलानी बड़ी संख्या में आते हैं। आकर खूबसूरत वादियों में छुट्टियां बिताना।घूमना फिरना, पर्यटन स्थलों, धार्मिक स्थलों के दीदार करना इनकी पसंद है।

वही उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के लक्ष्मीपुर क्षेत्र के कोल्हुआ उर्फ सिंहोरवां स्थित शिव मंदिर में फ्रांसीसी परिवार उत्तराखंड के पच्चीस दिन भ्रमण करने के पुनः फिर पहुंचा। गांव में वापस आने से गांव वालों के चेहरे खिल उठे।

यह फ्रांसीसी परिवार पांच माह तक इस गांव में निवास करने के बाद उत्तराखंड जाने के लिए जिला प्रशासन से अनुमति मांगी थी। 26 अगस्त 2020 को फ्रांसीसी परिवार दिल्ली रवाना हुआ था,जो उत्तराखंड गया था।वहां के धार्मिक स्थलों का भ्रमण कर शनिवार को फिर वापस महराजगंज लौट आया,इस परिवार को वापस गांव में देखकर लोगों ने खुशी के साथ स्वागत किया।

 

गौरतलब हो कि बीते पांच माह तक जिले में निवास करने के बाद फ्रांस के टूलूज शहर के रहने वाले फ्रांसीसी परिवार ने दिल्ली जाने से पूर्व जिलाधिकारी से मिलकर उत्तराखंड पर्यटन के लिए अनुमति मांगी थी। जो दिल्ली से अपने आवश्यक कार्यों को निपटाने के बाद परिवार पर्यटक स्थलों का लुत्फ उठाते हुए उत्तराखंड के प्रमुख स्थलों सहित धार्मिक स्थलों के दर्शन करने के पच्चीसवें दिन बाद लक्ष्मीपुर ब्लाक के कोल्हुआ उर्फ सिंहोरवां में अपने वाहन व ट्राली से फ्रांसीसी परिवार पहुंच गया।

इस फ्रांसीसी परिवार में मुखिया पैट्रीस पैलेरस व उनकी पत्नी वर्गिनी पैलेरस,दो बेटियां ओफिली पैलेरस व लोला पैलेरस तथा बेटा टाम पैलेरस,पालतू कुत्ता लकी व फ्रांसीसी परिवार का खास संजय यादव मंदिर पहुंचे गए।

स्थानीय ग्रामीण,महिलाएं व बच्चों ने घेरकर कुशलक्षेम पूछा व जलपान कराया। इस दौरान फ्रांसीसी परिवार व स्थानीय लोग दोबारा मिलकर खुश हो गए।

यह परिवार फ्रांस के टूलूज शहर से देशाटन के लिए निकला था।यह परिवार एक मार्च 2020 को बाघा बार्डर होते हुए भारत में आया। इनको भारत भ्रमण के बाद नेपाल जाना था। किंतु कोरोना संक्रमण के कारण नेपाल सीमा जब सील हुईं तो यह परिवार कोल्हुआ उर्फ सिहोंरवा स्थित एक मंदिर में 22 मार्च से अपना आशियाना डाल लिया। और महाराजगंज में ही ठहर गया। उपरांत इसके वीजा अवधि बढ़ाने को लेकर दिल्ली दूतावास संपर्क करने गए थे।इसके बाद फिर वापस महराजगंज आ गए।

गांव में इतने समय तक रहने के कारण इस परिवार ने गांव के लोगों का मन मोह लिया।लोगों के बीच एक ऐसा रिश्ता बन गया जो यहां की यादों को समेटकर यह परिवार लौट जाएगा।
फ्रांसीसी परिवार ने आज दिल्ली जाने के बारे में जानकारी दी है। उनके द्वारा सूचना दी गई है कि दिल्ली से म्यांमार जाएंगे। उत्तराखंड भ्रमण के बाद साथ गए गाइड को उसके गांव छोड़ने आए थे।

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