श्रद्धा बलिदान और तीर्थों की संगम स्थली दधीचि कुंड

गौरव गुप्ता
नैमिषारण्य सीतापुर संदेश महल

नैमिषारण्य सीतापुर संदेश महल

उत्तर प्रदेश के सीतापुर ज़िले में स्थित मिश्रिख तीर्थ, केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, श्रद्धा और आत्मबलिदान की महान परंपरा का जीवंत प्रतीक है। नैमिषारण्य से लगभग 12 किलोमीटर दूर स्थित दधीचि कुंड, वह दिव्य स्थान है जहाँ महर्षि दधीचि ने मानवता की रक्षा के लिए अपने शरीर तक का दान कर दिया था।

तीर्थों का संगम – दधीचि कुंड

एक लोकप्रिय धार्मिक मान्यता के अनुसार, दधीचि कुंड में सम्पूर्ण भारतवर्ष के पवित्र तीर्थों का जल समाहित है। यही कारण है कि इसे तीर्थों का संगम भी कहा जाता है। कहा जाता है कि जो भक्त विभिन्न तीर्थों की यात्रा नहीं कर सकते, वे केवल दधीचि कुंड में स्नान करके सभी तीर्थों का पुण्यफल प्राप्त कर सकते हैं।
यह दिव्य स्थल करीब 2 एकड़ क्षेत्र में फैला है और इसके समीप ही महर्षि दधीचि का भव्य मंदिर स्थित है, जिसमें उनके जीवन और बलिदान के विभिन्न पहलुओं को प्रदर्शित किया गया है।

बलिदान की अनुपम गाथा

पौराणिक कथा के अनुसार, सतयुग में वृत्रासुर नामक एक असुर 88,000 ऋषियों की तपस्या में विघ्न डाल रहा था। जब देवता और ऋषि भगवान लक्ष्मीनारायण के पास पहुँचे, तो उन्हें बताया गया कि वृत्रासुर का वध केवल उस वज्र से संभव है जो महर्षि दधीचि की हड्डियों से बनेगा।
जब इंद्र और अन्य देवता महर्षि के पास पहुँचे और उनसे यह असाधारण दान माँगा, तो उन्होंने इच्छा जताई कि वे मृत्यु से पूर्व सभी तीर्थों में स्नान करना चाहते हैं। समय की कमी को देखते हुए भगवान लक्ष्मीनारायण ने सभी तीर्थों, देवताओं और नदियों को एक ही स्थान – नैमिषारण्य – में आमंत्रित कर लिया। यहीं पर दधीचि जी ने फाल्गुन शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक नौ दिनों की परिक्रमा की।
नवमी को उन्होंने माँ ललिता देवी के समक्ष प्रकट होकर अंतिम स्नान की इच्छा जताई। तभी भगवान विष्णु ने पंच प्रयाग को एक में समाहित कर पंच-प्रयाग की स्थापना की और कहा कि प्रयागराज में स्नान जितना पुण्य उन्हें यहाँ झाड़ू लगाने से मिल सकता है।
अंततः, दधीचि ऋषि ने दही और नमक का उबटन लगाकर, अपने शरीर को इंद्र की गायों से चटवाया और अपनी हड्डियाँ दान में दे दीं, जिनसे बना वज्र वृत्रासुर के विनाश का कारण बना।

धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र

आज, मिश्रिख तीर्थ एक महत्वपूर्ण धार्मिक पर्यटन स्थल है, जो सीतापुर जिला मुख्यालय से 17 किमी तथा हरदोई रोड पर स्थित है। यहाँ हर वर्ष हजारों श्रद्धालु आते हैं, विशेषकर फाल्गुन में। मान्यता है कि दधीचि कुंड में एक बार स्नान करने से मनुष्य के सभी पाप और दुःखों का अंत हो जाता है।
दधीचि मंदिर, कुंड के किनारे स्थित, इस क्षेत्र की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्ता को और अधिक बढ़ा देता है। यहाँ महर्षि के कई रूपों की झलकियां श्रद्धालुओं को उनके त्याग और धर्म के प्रति समर्पण की याद दिलाती हैं।