वतन के इतिहास मे पतन की जो ईबारत लिखी जायेगी वह होगी अजूबा

 

 

 

 

जेपी रावत
संदेश महल समाचार

 

 

 

खुद में काबिलियत हो तो भरोसा कीजिये.. सहारे कितने भी अच्छे हो साथ छोड जाते?

देश का आम आदमी कठपुतली बन कर रह गया है। नोट बन्दी से शुरू हुआ सफर करोना के कहर मे घरबन्दी तक तमाम बिसंगतियो का जखीरा पैदा कर दिया।कश्मीर से धारा 370का समापन स्वर्ग सी धरती पर पनप रहा आतंकी बहसीपन पर रोक का प्रभावी कदम मान भी लिया जाय तो उसके अलावा आज तक साफ नहीं हो पाया कि बाहरी प्रदेशो के लोगों के लिये भूमि हस्तान्तरण नौकरी पेशा ब्यवसाय से लेकर शादी बिबाह के मामले मे क्या कानून कश्मीर मे लागू हुआ।सरकार जब बीजेपी की बनी दुबारा तो लगा खुल जायेगा सरकारी नौकरीयों का पिटारा।

मगर नही साहब।दिल के अरमा आँसुओ में बह गये।इन्तजार की घडियां समापन के तरफ है।न रोजगार मिला न नौकरी। प्राईवेट सेक्टर के हवाले ब्यवस्था सरकारी हो गयी।तमाम कल कारखाने बन्द हो गये।सारे हुनरमन्द बेकार हो गये।कल कारखानो मे काम करने वाले बेरोजगार हो गये।शहर से निकल कर गावों मे आकर घर पर भार हो गये।भुखमरी मुफलिसी चरम पर है।घर घर तबाही मचा रखी है करोना की महामारी। नौजवान मायूस है। दिहाड़ी करने वाले बधवास है।सङक की पटरी पर दूकान चलाने वालो का रोजगार गया।गरीबो का आहार गया।केवल तबाही है।तंगहाली।भूखमरी मे अन्न बिना पेट खाली है।अगर कोशिश किया जिन्दगी को सवारने का तो सरेयाम सुनना पुलिस की गाली है।वाह जनाब क्या जमाना आ गया? अट्टालिकाओ पर अबैध कब्जा करने वाले रसूखदार है।विधायक निवास सासंद निवास मे बर्षो से अबैध कब्जा करने वाले आज सरकारी मेहमान बनकर बने हुये वजन दार है।सरकारी आवासों मे अबैध कब्जा बिजली पानी का सारा बकाया।फिर भी इन पर मेहरबान है सरकार कर रही है माफ सारा बकाया।
गरीब जीवन चलाने के लिये सड़क पर सब्जी ठेला पर बेच रहा है तो सबसे बड़ा गुनाह गार है।इनको सबक सिखा रही सरकार है। कभी म्युनिसलपल्टी का कहर तो कभी सरेयाम सड़क पर बेईज्जत कर रहे है थानेदार है।हर तरफ तबाही है।भू माफीया सुरक्षित है। देश की रकम लूटकर बिदेशो मे रैन बसेरा बनाने वाले संरक्षित है। सियासत से परवरिश पाकर सियासी अपराधी अरबों खरबों का मालिक बनकर देश की ब्यवस्था मे भरष्टाचार का खेलकर सरकार के ही रहमोकरम पर आरक्षित है।और दिन रात मेहनत कर परिवार को जिलाने वाले गरीब असहाय दुकानदार आम आदमी असुरक्षित है। सारा कानून गरीब मजलूम मेहनतकश मजदूरो के लिये है।सरकार की सारी ब्यवस्था इस देश के अमीरों के लिये ही आरक्षित है।आक्रोश का लावा अन्दर ही अन्दर उबल रहा है।आम आदमी से लेकर खास तक के भीतर ज्जबात मचल रहा है।वक्त बदलने के इन्तजार में सियासतदार भी है। लेकिन नादिरशाही ब्यवस्था के आगे समय का समन्दर खामोश है।जिस दिन मौका मिला वतन के इतिहास मे पतन की जो ईबारत लिखी जायेगी वह अजूबा होगी।शायद पूरी दुनियाँ मे नहीं कोई दूजा होगी। सिसक सिसक कर जीवन की पथरीली राहों पर जिन्दगी बशर करने वालों का कहना है बद्दुआ की हवा कभी दिखाई नहीं देती।लेकीन जब दर्द देती है तो पुरवाई भी फेल हो जाती है।गुलामी की जंजीरो में जकड़ती जा रही है।भारतीय ब्यवस्था से धीरे धीरे लोगों की खतम होती जा रही है। जातिवाद की फैलती जहरीली बेल,समरसता के सूखते सागर में बैमनश्यता के पलते घडियाल यह मुद्दा देश के परिवेश मे खतरनाक बनकर उभरा है सवाल।आखिर कहाँ जा रहा है देश का लोकतन्त्र।स्वतन्त्र रहने के बाद भी कदम कदम पर आदमी मानसिक रूप से हो रहा है परतन्त्र। बर्तमान सरकार मे बिपक्ष मुर्दा हो गया।उसका वजूद भी खतरे मे है।ससंद मे सबकी बोलती बन्द है।अगर किसी ने सवाल उठाया तो उसको सियासी बवाल झेलना है।कहीं सीबीआई जांच तो कहीं अन्य जाँच ऐजन्सीयों की धीमी आच में उबलना है। सारा बुनियादी मुद्दा आसमानी हो गया।मुर्दा होती बिपक्ष की सियासत पर बात करना भी बेमानी हो गया।झूठ का विकाश सरकारी कागजो में भष्टाचार का परिहास कर रहा है।धरातल पर योजानाओं का पता नही गणना से भर गया है इस सदी का सारा इतिहास।इस सरकार की तरक्की में वजूद के साथ कुछ मौजूद है तो कश्मीर की बदलती शमशीर।और अयोध्या में बन रहा राममन्दिर।लेकीन किसी भी प्रदेश में न तो कोई कल कारखाना लगा न कोई रोजगार परख योजना का शिलान्यास हुआ।सब हवा हवाई बस खोज रही है सरकार करोना की दवाई।चाईना का चकल्लस रोज चल रहा है। पाकीस्तानी आतंकी देश के गद्दारो से परवरिश पा रहे है। सेना का मनोबल बढाने मे यह बर्तमान सरकार सफल रही है।लेकीन देश के अन्दर गद्दारो पर अंकुश लगाने मे बिफल रही है।जिस तरह से रोजगार के अभाव मे कामगार बेकार हो रहें है। नौजवान पढ लिखकर मायूस है।देश का अन्नदाता परेशान है। भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं हैं।