बरेली में 134.3 मिमी बारिश से सड़कें बनीं तालाब, 37 जिले बाढ़ की चपेट में
लखनऊ संदेश महल समाचार
सावन का महीना भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन उत्तर प्रदेश में मानसून की सक्रियता लगातार बनी हुई है। सोमवार सुबह लखनऊ, बाराबंकी, सीतापुर, गोंडा और बरेली समेत करीब 15 जिलों में तेज बारिश हुई। कई स्थानों पर जलभराव के कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।
रविवार को बरेली में सबसे अधिक 134.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। भारी बारिश के बाद शहर की कई सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं। निचले इलाकों में घरों और दुकानों में पानी घुस गया। जलभराव की समस्या को देखते हुए नगर निगम की टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं।
बरेली के अलावा मुरादाबाद, वाराणसी, लखनऊ, बिजनौर और अयोध्या समेत कई जिलों में भी बारिश और जलभराव से जनजीवन प्रभावित हुआ है। मुरादाबाद में रामगंगा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जबकि वाराणसी में गंगा का जलस्तर चेतावनी स्तर से नीचे आ गया है, लेकिन अभी भी 84 घाट जलमग्न बताए जा रहे हैं।
उधर, मौसम विभाग ने नेपाल से सटे प्रदेश के आठ जिलों में सोमवार को जोरदार बारिश की संभावना जताई है। तराई और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में 9 सितंबर तक मध्यम से भारी बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। हालांकि, बुधवार से कुछ दिनों के लिए मानसूनी गतिविधियों में कमी आने के आसार हैं।
यूपी में बाढ़ के हालात
अब तक 37 जिले बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं।
25 जिले अभी भी बाढ़ग्रस्त हैं।
19,454 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
प्रदेश में 1,315 बाढ़ शरणालय बनाए गए हैं।
6,698 लोग अभी भी शरणालयों में रह रहे हैं।
बाढ़ से 1,272 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं।
प्रभावित क्षेत्रों में लगातार रेस्क्यू अभियान जारी है।
राहत कार्य के लिए 2,075 नाव और मोटरबोट तैनात की गई हैं।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 2,072 मेडिकल टीमें गठित की गई हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है। प्रशासनिक टीमें प्रभावित इलाकों में निगरानी बनाए हुए हैं और जरूरत के अनुसार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।