मकानों को भी निगल रही नदी की धारा, पांच परिवारों के आशियाने नदी में समाए
जेपी रावत
बाराबंकी संदेश महल समाचार
हेतमापुर गांव में सरयू नदी का कटान लगातार तेज होता जा रहा है। नदी की धारा अब खेतों के साथ आबादी की ओर बढ़ रही है। बाबा नारायण दास समाधि स्थल भी सरयू नदी से महज करीब 25 मीटर की दूरी पर रह गया है। इससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।
ग्रामीणों के मुताबिक, अब तक करीब 380 बीघा जमीन और उसमें खड़ी धान की फसल सरयू नदी में समा चुकी है। कटान की चपेट में आने से पालटू, राजू, रामलोटन, पम्मू और कल्लू के मकान भी नदी में समा गए। सभी परिवार अपना सामान लेकर सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं।कटान बढ़ने के साथ ही गांव के कई अन्य मकानों पर भी खतरा मंडरा रहा है। रामू, श्यामू, रामराज समेत कई ग्रामीण अपने घर खाली कर जरूरी सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के बाद अब टूटे मकानों की ईंटें बटोर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इन्हीं ईंटों से हालात सामान्य होने पर दोबारा किसी तरह अपना आशियाना खड़ा करने की कोशिश करेंगे।
घर उजड़ते देख महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल
सरयू के कटान के बीच ग्रामीण परिवारों की बेबसी भी सामने आ रही है। वर्षों से बनाए गए घर और गृहस्थी को आंखों के सामने उजड़ता देख महिलाएं फूट-फूटकर रो रही हैं। एक महिला ने भावुक होकर कहा, मेरा घर टूट रहा है, मेरा वतन जा रहा है, हमें भी नदी में जाने दो।महिला की बात सुनकर परिजन उसे समझाते और ढांढस बंधाते नजर आए। उन्होंने कहा कि हालात सामान्य होने पर दोबारा मकान बना लिया जाएगा। लेकिन आंखों के सामने घर और वर्षों की गृहस्थी को नदी में समाते देख परिवारों का दर्द कम नहीं हो रहा है।
ग्रामीणों ने लगाए लापरवाही के आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि सरयू नदी लगातार तेजी से कटान कर रही है, लेकिन बाढ़ खंड विभाग के अधिकारियों ने समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कटान रोकने के लिए पहले ही ठोस इंतजाम किए जाते तो खेतों और मकानों को बचाया जा सकता था।अब नदी की धारा आबादी की ओर बढ़ती जा रही है। ऐसे में बचे हुए मकानों पर भी खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन और बाढ़ खंड विभाग से तत्काल प्रभावी कदम उठाकर कटान रोकने और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की मांग की है।