300 सालों से मंदिर में खून चढ़ाकर श्रद्धालु पूरी करते अपनी मुराद अद्भुत मंदिर

रिपोर्ट
जेपी रावत
गोरखपुर संदेश महल समाचार

आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के विषय में बताने जा रहे हैं जहां पिछले 300 सालों श्रद्धालु खून चढ़ाकर अपनी मुरादें पूरी करते चले आ रहे हैं। इस मंदिर में मां दुर्गा को रक्त चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है। बताया जा रहा है कोई भी भक्त इस मंदिर से निराश होकर नहीं लौटता है।जो भी मांगता है उसकी मुराद पूरी होती है।

गौरतलब हो कि उत्तर प्रदेश के गोरखपुर
जिले के बांसगांव तहसील कस्बे में स्थित मां दुर्गा के मंदिर में रक्त चढ़ाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। इस परंपरा के अंतर्गत 12 दिन के नवजात से लेकर 100 साल के बुजुर्ग तक का रक्त चढ़ाया जाता है। मान्यता है कि जिन नवजातों के ललाट, लिलार से रक्त निकाला जाता है, वे इसी मां की कृपा से प्राप्त हुए होते हैं।

मां दुर्गा के इस मंदिर में क्षत्रियों के श्रीनेत वंश के लोगों द्वारा नवरात्र में नवमी के दिन मां दुर्गा के चरणों में रक्त चढ़ाने की अनोखी परंपरा है। देश-विदेश में रहने वाले लोग यहां नवमी के दिन मां दुर्गा को अपना रक्त अर्पित करते हैं।नवजातों को मां के दरबार में लेकर श्रद्धालु पहुंचते हैं।उपनयन संस्कार के पूर्व तक एक जगह ललाट लिलार और (जनेऊ धारण करना-14 वर्ष की उम्र हो जाने के बाद युवकों-अधेड़ों और बुजुर्गों के शरीर से नौ जगहों से रक्त निकाला जाता है। उसे बेलपत्र में लेकर मां के चरणों में अर्पित किया जाता है।

खास बात है कि एक ही उस्तरे से विवाहितों के शरीर के नौ जगहों पर और बच्चों को माथे पर एक जगह चीरा लगाया जाता है।बेलपत्र पर रक्त को लेकर मां के चरणों में अर्पित कर दिया जाता है। इसके बाद धूप, अगरबत्ती और हवनकुंड से निकलने वाली राख को कटी हुई जगह पर लगा लिया जाता है। पुजारी का कहना है कि लोगों का मानना है कि ये मां का आशीर्वाद ही है कि आज तक इतने सालों में न तो किसी को टिटनेस ही हुआ न ही घाव भरने के बाद कहीं कटे का निशान ही पड़ा।

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