बाराबंकी,संदेश महल
हिन्द मेडिकल कॉलेज के ऑडिटोरियम में गुरुवार को राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग एवं राजकीय जिला पुस्तकालय, बाराबंकी में स्थापित तनाव प्रबंधन प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में “परीक्षा पर्व” विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई।इस कार्यशाला में जनपद के खंड शिक्षा अधिकारी डायट प्रशिक्षक माध्यमिक एवं बेसिक शिक्षा से जुड़े प्रधानाचार्य, शिक्षक एवं अभिभावकों सहित लगभग 700 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि उप जिलाधिकारी आनंद तिवारी एवं विशिष्ट अतिथि जिला विद्यालय निरीक्षक ओ.पी. त्रिपाठी ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। सभी अतिथियों का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया गया।कार्यक्रम का संचालन नेशनल इंटर कॉलेज, फतेहपुर के प्रवक्ता अशीष पाठक ने किया।कार्यशाला में अभिभावक जे.पी. वर्मा ने परीक्षा के दौरान एवं पश्चात छात्रों में उत्पन्न तनाव और उसके प्रबंधन पर चर्चा की। उन्होंने विद्यार्थियों और अभिभावकों दोनों के लिए समय प्रबंधन की आवश्यकता पर बल दिया।
खंड शिक्षा अधिकारी, देवा रामनारायण ने कहा कि प्राथमिक स्तर से ही बच्चों पर अनावश्यक दबाव डालने की प्रवृत्ति को रोकना आवश्यक है और अभिभावकों को बच्चों को स्वतंत्रता और सुरक्षा दोनों देनी चाहिए।
प्रधानाचार्य दिनेश चंद्र पाण्डेय ने परीक्षा के दौरान बच्चों में उत्पन्न तनाव के कारणों पर चर्चा करते हुए कहा कि “समाज क्या कहेगा” यह महत्वपूर्ण नहीं,बल्कि “बच्चा क्या चाहता है” यह अधिक महत्वपूर्ण है।खंड शिक्षा अधिकारी, हरख श्रीमती अर्चना ने कहा कि बच्चों की तुलना दूसरों से न करें,बल्कि उनकी प्रतिभा को पहचानने और संवारने का अवसर दें।कार्यक्रम की नोडल अधिकारी डॉ. पूनम सिंह ने कहा कि “हर बच्चे की प्रतिभा अलग होती है,इसलिए शिक्षकों और अभिभावकों को उन्हें उनकी रुचि के अनुसार प्रोत्साहित करना चाहिए।राजकीय इंटर कॉलेज,बेलहरा के प्रधानाचार्य डी.पी. तिवारी ने अपनी कविता के माध्यम से शिक्षण पद्धति में सुधार और छात्रों के तनाव प्रबंधन पर प्रकाश डाला।
मुख्य अतिथि आनंद तिवारी ने कहा कि यदि किसी कार्य में रुचि नहीं है,तो वह तनाव का कारण बनता है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों की मंज़िल का सफर उनका अपना हो,और वे केवल मार्गदर्शक की भूमिका निभाएं।कार्यक्रम के अंत में जिला विद्यालय निरीक्षक ओ.पी. त्रिपाठी ने कहा कि “जीवन का प्रत्येक पल एक परीक्षा है,और सही मार्गदर्शन से बच्चे तनाव मुक्त रह सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि “यदि बच्चे तनावग्रस्त महसूस करें, तो बिना हिचकिचाहट मनोचिकित्सक की सहायता लें कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय गान के साथ हुआ।