महादेवा महोत्सव में संस्कृति का संगम पिपरी मोहार के बच्चों की प्रस्तुति रही आकर्षण का केंद्र

रामनगर बाराबंकी संदेश महल
ऐतिहासिक महादेवा महोत्सव का मंगलवार का दिन पूरी तरह सांस्कृतिक रंगों,भक्ति संगीत और दर्शकों की उत्साही भागीदारी को समर्पित रहा। दिनभर चले कार्यक्रमों में क्षेत्रीय विद्यालयों के बच्चों ने अपनी प्रतिभा तैयारी और आत्मविश्वास से मंच पर एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियाँ दीं। महोत्सव में आए हजारों श्रद्धालुओं और दर्शकों ने इन प्रस्तुतियों को खूब सराहा।इसी क्रम में प्राथमिक विद्यालय पिपरी मोहार, सूरतगंज के नन्हें कलाकारों ने राधा–कृष्ण नृत्य नाटिका से पूरे पंडाल में ऐसा दिव्य वातावरण बनाया कि तालियों की गड़गड़ाहट देर तक नहीं थमी। कक्षा 5 के राघवेन्द्र शुक्ला ने बाल-गोपाल कृष्ण की भूमिका निभाते हुए मनमोहक अदाएं, बांसुरी की मुद्राएँ और नृत्य की लय से दर्शकों का दिल जीत लिया। वहीं श्रेया शुक्ला ने राधा बनकर भाव-भंगिमा, सौम्यता और सुंदर नृत्य-रचनाओं से प्रस्तुति को और प्रभावशाली बना दिया।
गोपियों का मंचन भी रहा सराहनीय
गोपियों के रूप में सृष्टि तिवारी (कक्षा 4) प्रियांशी शुक्ला (कक्षा 4) सृष्टि वर्मा (कक्षा 5) आंचल वर्मा (कक्षा 4) ने अत्यंत संतुलित, सहज और सुंदर भावों के साथ समूह नृत्य प्रस्तुत किया। बच्चों का तालमेल, पारंपरिक वेशभूषा और चेहरे की अभिव्यक्तियाँ दर्शकों को बरबस ही ब्रज की गलियों का अहसास करा गईं।पूरी प्रस्तुति का संयोजन लवली सिंह (स.अ.) द्वारा किया गया। उन्होंने बच्चों को नृत्य-रचना, मंच अनुशासन और चरित्र के अनुरूप अभिनय के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया। उनके निर्देशन में बच्चों ने बेहतरीन प्रदर्शन कर विद्यालय का नाम रोशन किया।महोत्सव में मौजूद अभिभावकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अधिकारियों ने विद्यालय की इस सांस्कृतिक प्रस्तुति की भूरी-भूरी प्रशंसा की। आयोजन समिति के पदाधिकारियों का कहना था कि पिपरी मोहार के बच्चों की यह प्रस्तुति पूरे दिन का सबसे आकर्षक कार्यक्रम रही। महादेवा महोत्सव में बच्चों का मनोबल बढ़ाने के लिए विद्यालय परिवार को मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। महादेवा महोत्सव में मिली सराहना ने बच्चों के आत्मविश्वास को और बढ़ा दिया है।