स्मार्ट डिजिटल बोर्ड से बच्चों के लिए खुला आधुनिक शिक्षा का नया द्वार

फतेहपुर बाराबंकी संदेश महल
विकास खंड फतेहपुर के अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय गुरसेल में एक प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें विद्यालय के पूर्व छात्र एवं वर्तमान में सहायक अभियंता निमेष वर्मा ने अपने पुराने विद्यालय को लगभग एक लाख चार हजार रुपये मूल्य का स्मार्ट डिजिटल बोर्ड भेंट किया। इस पहल से विद्यालय में आधुनिक डिजिटल शिक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ा है।कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण से किया गया। इसके बाद सहायक अभियंता निमेष वर्मा, खंड शिक्षा अधिकारी फतेहपुर धर्मेंद्र प्रसाद तथा उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ, बाराबंकी के जिलाध्यक्ष डॉ. राकेश सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया।इस अवसर पर विद्यालय के नौनिहाल बच्चों ने मां वीणा वादिनी सरस्वती की मधुर वंदना प्रस्तुत कर पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इसके उपरांत निमेष वर्मा के करकमलों द्वारा फीता काटकर विद्यालय में स्मार्ट क्लास का उद्घाटन किया गया। स्मार्ट डिजिटल बोर्ड के माध्यम से बच्चों में पढ़ाई के प्रति नई उत्सुकता और सीखने की ललक स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
खंड शिक्षा अधिकारी धर्मेंद्र प्रसाद ने स्मार्ट डिजिटल बोर्ड पर प्रेरणा ऐप इंस्टॉल कर बच्चों को उसके उपयोग और महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी तथा डिजिटल शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से बच्चों की सीखने की क्षमता और रुचि दोनों में वृद्धि होती है।कार्यक्रम में ग्राम प्रधान आशीष चंद्र, उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के ब्लॉक मंत्री दिनेश मौर्य, उपाध्यक्ष परमेंद्र कुमार, संयुक्त मंत्री प्रवेश सिंह, प्रचार मंत्री शरद चंद्र, ब्लॉक एआरपी अशोक कुमार, सुशील कुमार, राहुल यादव, सुरेश कुमार, शंकुल प्रभारी प्रवेश कुमार, प्रमोद कुमार, कृष्ण कुमार, अविनाश शुक्ला, आनंद मोहन, गुनीत शर्मा, अनुभव पोद्दार, इंद्र कुमार, महेंद्र वर्मा, अतुल वर्मा सहित अनेक गणमान्य अतिथि एवं शिक्षकगण उपस्थित रहे।अंत में विद्यालय परिवार की ओर से इंचार्ज सहायक अध्यापिका श्रीमती सीमा गौतम,भानु मिहिर, शैल कुमारी एवं अनुराज कुमार सहित समस्त शिक्षकों ने कार्यक्रम में पधारे सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
यह पहल न केवल विद्यालय के बच्चों के लिए आधुनिक शिक्षा का नया द्वार खोलती है। बल्कि समाज के अन्य लोगों को भी अपने विद्यालय और शिक्षा के प्रति योगदान देने के लिए प्रेरित करती है।