बाराबंकी संदेश महल
एक ही शैक्षिक प्रमाणपत्र और दस्तावेजों के सहारे दो जिलों में सरकारी नौकरी करने का मामला सामने आने के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। मामला बाराबंकी और प्रतापगढ़ जिलों से जुड़ा है।

जानकारी के अनुसार सतरिख थाना क्षेत्र के नरौली गांव निवासी जयप्रकाश सिंह ने वर्ष 1979 में प्रतापगढ़ जिले के स्वास्थ्य विभाग में नॉन मेडिकल असिस्टेंट (एनएमए) के पद पर नियुक्ति प्राप्त की थी। इसके बाद वर्ष 1993 में उन्होंने बाराबंकी के बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक पद पर भी नौकरी हासिल कर ली। हैरानी की बात यह रही कि दोनों नियुक्तियों में लगभग एक जैसे दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया और लंबे समय तक दोनों विभागों से वेतन मिलता रहा।सरकारी नियमों के अनुसार एक व्यक्ति एक समय में केवल एक ही सरकारी पद पर कार्य कर सकता है, लेकिन आरोपी करीब 17 वर्षों तक दोनों जिलों में कर्मचारी के रूप में दर्ज रहा।मामले का खुलासा वर्ष 2009 में सूचना का अधिकार के माध्यम से हुआ। शिकायत के बाद जांच में दोनों विभागों के रिकॉर्ड खंगाले गए, जिसमें आरोपी के एक साथ दो जगह कार्यरत होने की पुष्टि हुई। इसके बाद उसके खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचना के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया।सुनवाई के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए सात वर्ष के कठोर कारावास और 30 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। अदालत ने सरकारी खजाने से लिए गए वेतन की वसूली के भी आदेश दिए हैं।
इस मामले के सामने आने के बाद सरकारी तंत्र की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर इतने लंबे समय तक यह मामला अधिकारियों की नजर से कैसे बचा रहा।