मक्का खेती से बढ़ेगी किसानों की आय, विकास प्रदर्शनी में आयोजित हुई कृषक गोष्ठी

संत कबीर नगर संदेश महल समाचार

केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर चलाए जा रहे समेकित जनकल्याण एवं जन-जागरूकता अभियान के तहत विकास भवन स्थित डीपीआरसी हॉल परिसर में आयोजित तीन दिवसीय जनकल्याणकारी शिविर एवं विकास प्रदर्शनी के दूसरे दिन कृषि विभाग द्वारा त्वरित मक्का विकास कार्यक्रम योजना के अंतर्गत जनपद स्तरीय मक्का विकास कृषक गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी ने की।


कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य विकास अधिकारी द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर कृषि विभाग, पशुपालन विभाग, उद्यान विभाग, बाल विकास परियोजना, इफको, कृषक उत्पादक संघ तथा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना सहित विभिन्न विभागों और संस्थाओं द्वारा स्टॉल लगाए गए। गोष्ठी में जिले के विभिन्न विकास खंडों से आए लगभग 300 किसानों एवं महिला किसानों ने सहभागिता की।
कृषि विज्ञान केंद्र बगही के वैज्ञानिक डॉ. देवेश कुमार ने आधुनिक खेती की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से मृदा स्वास्थ्य प्रभावित हुआ है। किसानों को मिट्टी की जांच, जैविक खेती और हरी खाद के उपयोग को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने धान की फसल से पहले ग्रीष्मकालीन जुताई करने तथा फसल चक्र अपनाने की सलाह दी।
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. दुर्गेश कुमार ने मक्का की खेती की उन्नत तकनीकों की जानकारी देते हुए बताया कि किसान मक्का की खेती से धान और गेहूं की तुलना में अधिक लाभ अर्जित कर सकते हैं। उन्होंने कीट प्रबंधन और अधिक उत्पादन प्राप्त करने के वैज्ञानिक तरीकों पर भी विस्तार से चर्चा की।
नाथनगर विकास खंड के ग्राम तरयापार निवासी किसान यशवर्धन पांडेय ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि जागरूकता कार्यक्रमों के बाद क्षेत्र में मक्का की खेती का दायरा तेजी से बढ़ा है। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा बैच ड्रायर उपलब्ध कराए जाने से मक्का में नमी की समस्या दूर हुई है और उत्पादित मक्का इथेनॉल निर्माण के लिए भेजा जा रहा है, जिससे किसानों को बेहतर लाभ मिल रहा है। वर्तमान में क्षेत्र के किसान एक एकड़ में 35 से 40 कुंतल तक मक्का का उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं।
सेमरियावां विकास खंड के प्रगतिशील किसान सुरेंद्र राय ने धान की सीधी बुवाई और मक्का की खेती के लाभों पर प्रकाश डालते हुए किसानों को मक्का उत्पादन अपनाने के लिए प्रेरित किया।
जिला कृषि अधिकारी ने किसानों को बीजों की उपलब्धता की जानकारी देते हुए बताया कि धान, ढैंचा, दलहन, तिलहन, अरहर, तिल, उड़द एवं श्रीअन्न के बीज उपलब्ध हैं। किसान ऑनलाइन बुकिंग के माध्यम से इन्हें प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि बीज वितरण के लिए किसानों का चयन ई-लॉटरी के माध्यम से किया जाएगा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिले में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है और किसानों को अफवाहों पर ध्यान देने के बजाय अपनी आवश्यकता के अनुसार उर्वरक प्राप्त करना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि बिना फार्मर रजिस्ट्री के किसानों को उर्वरक सहित अन्य योजनाओं का लाभ नहीं मिल सकेगा।
कार्यक्रम के अंत में उप कृषि निदेशक ने सभी उपस्थित किसानों का आभार व्यक्त करते हुए गोष्ठी के समापन की घोषणा की।