दीपू सिंह
मैनपुरी संदेश महल समाचार
औडेन्य पड़रिया गांव की सुबह एक दर्दनाक हादसे के साथ शुरू हुई। गांव के बाहर सड़क किनारे खड़े एक पेड़ पर जब लोगों की नज़र गई तो वहां लटकते शव को देखकर हर कोई सन्न रह गया। ग्रामीणों ने पहचान की तो पता चला कि यह शव अमित (पुत्र राजेश), एक गरीब श्रमिक का है, जो शुक्रवार रात से घर से लापता था।
अमित की उम्र भले ही ज़्यादा न रही हो, लेकिन उसने अपने पीछे ज़िम्मेदारियों का ऐसा पहाड़ छोड़ दिया है जो किसी भी इंसान को भीतर तक झकझोर सकता है। मजदूरी कर किसी तरह परिवार का भरण-पोषण करने वाला यह युवक अचानक दुनिया छोड़ गया, और उसकी मौत के साथ ही पत्नी और चार मासूम बच्चों का सहारा भी टूट गया।
परिजनों का कहना है कि अमित रात से ही घर से गायब था। जब सुबह शव मिला तो पूरे गांव में कोहराम मच गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। शुरुआती आशंका आत्महत्या की जताई जा रही है, हालांकि पुलिस जांच के बाद ही सच्चाई स्पष्ट हो पाएगी।
गांव के लोग बताते हैं कि अमित मेहनतकश इंसान था, जो रोज़ की मजदूरी से अपने बच्चों की भूख मिटाता था। उसके पास न कोई बड़ी ज़मीन थी और न ही जमा पूंजी। परिवार की रोज़ी-रोटी उसी की मेहनत पर टिकी थी। उसकी मौत से जहां परिवार पर दुखों का पहाड़ टूटा है, वहीं अब जीविका का संकट भी गहरा गया है।
गांव की गलियों में मातम पसरा है। अमित की पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है और चार मासूम बच्चों के मासूम चेहरे भविष्य की अनिश्चितताओं में खोए हुए हैं। यह दृश्य हर देखने वाले की आंखें नम कर रहा है।
इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि समाज में ऐसे श्रमिक परिवारों की सुध कौन लेगा, जिनकी पूरी दुनिया रोज़ की कमाई पर टिकी रहती है। क्या किसी गरीब मजदूर की जिंदगी इतनी सस्ती है कि उसकी मौत के बाद बस चंद पंक्तियों की खबर बनकर रह जाए? या फिर इस मौत से शासन-प्रशासन को यह सोचने पर मजबूर होना चाहिए कि कैसे ऐसे परिवारों को सहारा दिया जाए।
फिलहाल गांव का हर दिल इस घटना से व्यथित है। अमित अब इस दुनिया में नहीं रहा, लेकिन उसके चार बच्चे और पत्नी आने वाले दिनों में हर रोज़ उसकी कमी महसूस करेंगे। यह केवल एक मौत नहीं, बल्कि पूरे परिवार के भविष्य पर मंडराता गहरा अंधेरा है।