शाहजहांपुर, संदेश महल समाचार।
ब्रिटिश शासनकाल में वर्ष 1870 में बनी ऐतिहासिक शाहजहांपुर जेल में इस बार कुछ अनोखा हुआ। जेल की ऊँची दीवारों के भीतर पहली बार भव्य रामलीला का मंचन किया गया। इस अद्भुत आयोजन ने कैदियों के चेहरों पर मुस्कान ला दी और उनके मन में नया उत्साह भर दिया।
रामलीला के मंचन में सीता स्वयंवर, परशुराम-लक्ष्मण संवाद और धनुष भंग की कथा का सजीव चित्रण हुआ। कलाकारों के अभिनय और संवादों ने जहां जेल प्रशासन का दिल जीत लिया, वहीं कैदी भी मंत्रमुग्ध होकर ताली बजाते नज़र आए।
जेल अधीक्षक मिजाजी लाल ने इस अवसर पर सभी कलाकारों को सम्मानित किया। उन्होंने कहा, “सामान्यतः रामलीला का आनंद गांव-शहरों में हर कोई लेता है, लेकिन कैदियों को यह अवसर नहीं मिल पाता। इस बार हमने प्रयास किया कि उन्हें भी यह सौभाग्य मिले। कैदियों के चेहरे पर जो खुशी और उत्साह दिखा, वही इस आयोजन की सबसे बड़ी सफलता है।
जेल प्रशासन का मानना है कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन न केवल कैदियों के लिए मनोरंजन का साधन बनते हैं, बल्कि उनके मानसिक स्वास्थ्य को भी संबल प्रदान करते हैं और उन्हें तनाव व अवसाद से दूर रखते हैं।