श्रीमद्भागवत कथा में हुआ श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, जयकारों से गूंजा कथा पंडाल

पिसावां (सीतापुर)। क्षेत्र के करमलकुइया गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कथावाचक हरिओम प्रेमी ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कथा का भावपूर्ण वर्णन किया। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग सुनते ही कथा पंडाल जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालु भक्ति में लीन हो गए और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
कथावाचक हरिओम प्रेमी ने श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुनाते हुए बताया कि द्वापर युग में मथुरा पर राजा उग्रसेन का शासन था। उनके पुत्र कंस ने अपने पिता को राजगद्दी से हटाकर स्वयं मथुरा का राजा बन गया। कंस की बहन देवकी का विवाह वसुदेव के साथ हुआ था। विवाह के बाद जब कंस अपनी बहन देवकी को विदा कराकर ससुराल पहुंचाने जा रहा था, तभी रास्ते में आकाशवाणी हुई कि देवकी का आठवां पुत्र ही कंस के विनाश का कारण बनेगा।
यह आकाशवाणी सुनकर कंस क्रोधित हो उठा और देवकी को मारने के लिए उद्यत हो गया। तब वसुदेव ने कंस से विनती करते हुए कहा कि वह देवकी को न मारे। देवकी से उत्पन्न होने वाली संतानों को वह स्वयं कंस के हवाले कर देंगे। वसुदेव की बात मानकर कंस ने देवकी को जीवनदान तो दे दिया, लेकिन वसुदेव और देवकी को कारागार में बंद कर दिया।
कथावाचक ने बताया कि कंस ने देवकी की एक-एक करके सात संतानों की हत्या कर दी। इसके बाद आठवीं संतान के जन्म का समय आया तो कारागार में पहरा और कड़ा कर दिया गया। उधर, गोकुल में नंद बाबा की पत्नी यशोदा के यहां भी संतान का जन्म होने वाला था।
धार्मिक कथा के अनुसार, आधी रात को कारागार में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। उसी समय देवकी और वसुदेव के सामने भगवान चतुर्भुज रूप में प्रकट हुए। भगवान के जन्म के साथ ही कथा पंडाल में मौजूद श्रद्धालुओं ने ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारे लगाए। पूरा पंडाल भक्तिमय हो उठा और श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का आनंद लिया।
श्रीकृष्ण जन्म का प्रसंग श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। कथा के दौरान भक्ति, श्रद्धा और धर्म के संदेश ने उपस्थित लोगों को भावविभोर कर दिया।