किसान क्रेडिट कार्ड से लोन की लिमिट को तीन लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये

1 अप्रैल से नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ कई अहम बदलाव लागू हो गए हैं। खासतौर पर किसानों के लिए यह साल कुछ बड़े फैसले लेकर आया है।लेकिन सवाल ये है— ये बदलाव किसानों के लिए कितने फायदेमंद हैं? आइए, एक-एक करके जानते हैं।

किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) – अब मिलेगा ज्यादा लोन

किसानों के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी। अब किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) से मिलने वाले लोन की लिमिट 3 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई है।

✅ अब किसान बिना किसी झंझट के ज्यादा लोन ले सकेंगे और खेती से जुड़ी जरूरतें आसानी से पूरी कर पाएंगे।
✅ बीज, उर्वरक, कीटनाशक, सिंचाई— हर जरूरी खर्च के लिए अब और ज्यादा पैसा मिलेगा।
✅ फसल उत्पादन ही नहीं, बल्कि डेयरी, मत्स्य पालन और पशुपालन से जुड़े किसानों को भी इसका फायदा मिलेगा‌।

अब आंकड़ों पर नजर डालते हैं—

▶ 31 दिसंबर 2024 तक KCC खातों में कुल राशि 10 लाख करोड़ रुपये पार कर गई।
▶ 7.72 करोड़ किसानों को इसका सीधा फायदा मिला।
▶ 2014 में यह रकम सिर्फ 4.26 लाख करोड़ रुपये थी— यानी 10 साल में जबरदस्त उछाल।

लेकिन बजट में कटौती— यह किसानों के लिए खतरा या नई रणनीति?

अब बात करते हैं सबसे बड़े सवाल की?
इस साल सरकार ने कृषि मंत्रालय का बजट 2.75% घटाकर 1.37 लाख करोड़ रुपये कर दिया है।
क्या यह किसानों के लिए चिंता की बात है ? या फिर सरकार ने कोई और तरीका अपनाया है!्?

बिल्कुल सरकार ने इस कमी की भरपाई दूसरी योजनाओं से की है—

▶ मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी सेक्टर का बजट 37% बढ़ाकर 7,544 करोड़ रुपये कर दिया गया।

▶ खाद्य प्रसंस्करण सेक्टर को 56% ज्यादा बजट यानी 4,364 करोड़ रुपये का आवंटन मिला।

▶ अग्रिकल्चर, संबद्ध क्षेत्रों और फूड प्रोसेसिंग को मिलाकर कुल बजट अब 1.45 लाख करोड़ रुपये हो गया है।

तो कुल मिलाकर खेल क्या है?

सरकार अब सीधे खेती के बजाए उससे जुड़े उद्योगों— जैसे डेयरी, मत्स्य पालन और फूड प्रोसेसिंग को ज्यादा फंडिंग दे रही है। इससे किसान सिर्फ खेती पर निर्भर न रहकर, दूसरे क्षेत्रों में भी आगे बढ़ सकें।

अब असली सवाल—

❓ क्या KCC की लिमिट बढ़ने से किसानों की असली दिक्कतें हल हो जाएंगी?

❓ बजट में कटौती के बावजूद कृषि क्षेत्र आगे बढ़ पाएगा?

❓ पशुपालन, डेयरी और फूड प्रोसेसिंग को बढ़ावा देना किसानों के लिए कितना फायदेमंद होगा?

आपका क्या कहना है? क्या ये फैसले सही दिशा में हैं या फिर किसानों को और बेहतर नीतियों की जरूरत है? अपनी राय जरूर बताएं।

 

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