शिवम मिश्रा संवाददाता (संदेश महल)बाराबंकी। मंगलवार दोपहर अचानक गेहूं की फसल में आग लग गई। देखते ही देखते पछुआ हवा के चलते आग ने विकराल रूप ले लिया और सैकड़ों बीघा फसल जलकर राख हो गई। खेतों में काम कर रहे किसानों ने जब आग की लपटें और काला धुआं उठते देखा, तो चीख-पुकार मच गई। सूचना मिलते ही गांव के लोग मौके पर दौड़े, अफरा-तफरी मच गई! पुलिस को खबर दी गई! खेतों में पानी डालने के लिए पंपिंग सेट चलाए गए, ट्रैक्टरों से जुताई कर आग रोकने की कोशिश हुई, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। रामनगर तहसील के रामवापुर, कुतलूपुर और नर्सरी गांवों के किसानों की मेहनत जलकर राख हो गई। जैसे ही इस दर्दनाक घटना की खबर मिली, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि ताहिर खां ने तत्काल लेखपाल को बुलाया और नुकसान का आकलन करवाया। इन किसानों की फसल पूरी तरह से तबाह हो गई जिसमें ताहिर खां, रमापति, माताप्रसाद, अवध राम, श्याम सुंदर, जगतपाल, गुड्डा, राजाराम, हरिशंकर, साबिर, रामसमुझ, मेराज, रियाज, अफसर, निसार, रफीक, मुंशी, नफीसा, सगीर अहमद, इंसान अली, रामचंदर, सिम्मी, मोहब्बत अली, तौहीद, अमीन, दिलेराम, अलीम आदि किसानों का नुकसान हुआ हैं। इस संबंध में लेखपाल रवि का कहना है कि नुकसान का आकलनकिया जा रहा है। सर्वे करके उचित सहायता राशि के लिए रिपोर्ट भेज दी जाएगी। अब सवाल उठता है कि आखिर आग लगी कैसे? किसानों की इतनी बड़ी तबाही का जिम्मेदार कौन होगा? फिलहाल स्थानीय किसान प्रशासन से राहत की उम्मीद कर रहे हैं।