महर्षि वाल्मीकि जयंती पर चित्रकला शिविर, कलाकारों ने कैनवास पर साकार किए रामायण के प्रसंग

लखनऊ संदेश महल समाचार
महर्षि वाल्मीकि जयंती के पावन अवसर पर राज्य ललित कला अकादमी, उत्तर प्रदेश की ओर से संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश शासन के अंतर्गत आयोजित दो दिवसीय लाइव चित्रकला शिविर के प्रथम दिवस पर कलाकारों ने रामायण के विविध प्रसंगों को अपनी कलात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से कैनवास पर जीवंत कर दिया। कार्यक्रम का आयोजन कैसरबाग स्थित लाल बारादरी भवन के अकादमी परिसर में किया गया।शिविर में आमंत्रित कलाकारों ने महर्षि वाल्मीकि के जीवन, उनके महान साहित्यिक योगदान तथा रामायण के विभिन्न प्रसंगों को चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया। कलाकारों की रचनात्मकता ने भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं और पौराणिक आख्यानों को कलात्मक स्वरूप प्रदान किया।
कला के माध्यम से सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की पहल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं, महापुरुषों के जीवन-दर्शन तथा सामाजिक समरसता के मूल्यों को प्रोत्साहित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। महर्षि वाल्मीकि का जीवन और कृतित्व समाज को समता, करुणा, नैतिकता एवं मानवीय संवेदनाओं का संदेश देता है। इसी उद्देश्य से आयोजित यह शिविर कला के माध्यम से उनके विचारों और भारतीय सांस्कृतिक विरासत को जनमानस तक पहुंचाने की महत्वपूर्ण पहल है।
संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह की प्रेरणा से प्रदेश में कला और संस्कृति की विभिन्न विधाओं के संरक्षण, संवर्धन तथा कलाकारों को रचनात्मक अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। महापुरुषों की जयंती जैसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक अवसरों पर आयोजित कला गतिविधियां नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।अपर मुख्य सचिव, संस्कृति एवं पर्यटन अमृत अभिजात के निर्देशन में आयोजित इस शिविर का उद्देश्य कलाकारों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करना और भारतीय सांस्कृतिक आख्यानों को समकालीन चित्रकला के माध्यम से प्रस्तुत करना है।अकादमी के अध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार विश्वकर्मा एवं उपाध्यक्ष गिरीश चन्द्र मिश्रा द्वारा तैयार रूपरेखा के अनुसार शिविर में दस कलाकारों को आमंत्रित किया गया है। प्रथम दिवस पर प्रतिभागी कलाकारों को अकादमी की ओर से 2.5 × 3 फीट आकार के कैनवास और एक्रिलिक रंग उपलब्ध कराए गए।कलाकारों ने इन माध्यमों से रामायण के विविध प्रसंगों, महर्षि वाल्मीकि के जीवन और उनके साहित्यिक योगदान को चित्रों में उकेरा। दो दिवसीय इस शिविर के माध्यम से कला और संस्कृति के समन्वय से भारतीय परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।