डॉ.आंबेडकर के आर्थिक विचार आज भी प्रासंगिक : सुरेंद्र कुमार आजाद

जेपी रावत
धौरहरा लखीमपुर खीरी संदेश महल
सिविल कोर्ट लखीमपुर खीरी के अधिवक्ता एवं अर्थशास्त्र में परास्नातक सुरेंद्र कुमार आजाद ने कहा कि भारत की वर्तमान आर्थिक चुनौतियों का समाधान डॉ. भीमराव आंबेडकर के आर्थिक विचारों में निहित है। उन्होंने कहा कि डॉ. आंबेडकर केवल संविधान निर्माता ही नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी अर्थशास्त्री भी थे, जिनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं।
धौरहरा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अधिवक्ता आजाद ने बताया कि डॉ. आंबेडकर ने वर्ष 1923 में प्रकाशित अपनी चर्चित पुस्तक “द प्रॉब्लम ऑफ द रुपी” में भारतीय मुद्रा व्यवस्था, महंगाई और वित्तीय प्रबंधन से जुड़ी समस्याओं का विस्तृत विश्लेषण किया था। उन्होंने कहा कि देश आज जिस प्रकार महंगाई, आर्थिक असमानता और बढ़ते कर्ज जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है, उसके समाधान के लिए डॉ. आंबेडकर के आर्थिक चिंतन का अध्ययन आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि डॉ. आंबेडकर के अनुसार मुगल काल के अंतिम दौर में भारत आर्थिक दृष्टि से काफी समृद्ध था। उस समय व्यापार, बैंकिंग व्यवस्था और वित्तीय लेन-देन की प्रणाली विकसित थी। बाद में मुद्रा व्यवस्था में असंतुलन और विनिमय संबंधी समस्याओं ने आर्थिक चुनौतियों को जन्म दिया। डॉ. आंबेडकर ने अपनी पुस्तक में इन मुद्दों पर विस्तार से प्रकाश डाला है।सुरेंद्र कुमार आजाद ने बताया कि डॉ. आंबेडकर के आर्थिक विचारों का प्रभाव भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की स्थापना की अवधारणा पर भी देखा जाता है। उन्होंने कहा कि देश के आर्थिक विकास में डॉ. आंबेडकर का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन उनके आर्थिक दृष्टिकोण पर अपेक्षित चर्चा नहीं हो पाती।उन्होंने कहा कि डॉ. आंबेडकर ने सामाजिक न्याय के साथ साथ आर्थिक सशक्तीकरण पर भी विशेष बल दिया था। उनके विचार आज भी देश को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।