“आकाश से गिरा, खजूर पर अटका” मंडार क्षेत्र के किसान दोहरी मार झेलने को मजबूर
सिरोही राजस्थान संदेश महल समाचार
रेवदर विधानसभा क्षेत्र के किसानों की समस्याएं कम होने के बजाय और बढ़ती नजर आ रही हैं। वर्षों तक ऑफलाइन रही जमाबंदी के कारण परेशान किसानों को ऑनलाइन व्यवस्था से राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन अब रिकॉर्ड में त्रुटियों और तकनीकी गड़बड़ियों ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। किसानों का कहना है कि उनकी स्थिति अब “आकाश से गिरा, खजूर पर अटका” जैसी हो गई है।
मंडार, सोरडा, मगरीवाड़ा, पीथापुरा, वडवज सहित करीब 25 गांवों में लंबे समय तक जमाबंदी ऑनलाइन नहीं होने से किसानों को नामांतरण, बैंक रहन, उत्तराधिकार, किसान आईडी और अन्य सरकारी योजनाओं से जुड़ी प्रक्रियाओं में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। इस समस्या को लेकर कांग्रेस नेता Mafatlal Bunakar ने प्रशासन को ज्ञापन देकर जमाबंदी ऑनलाइन करने की मांग उठाई थी।
सरकार द्वारा पोर्टल शुरू किए जाने के बाद किसानों में राहत की उम्मीद जगी, लेकिन अब ऑनलाइन रिकॉर्ड में कई खामियां सामने आने लगी हैं। किसानों का आरोप है कि खातेदारों के नाम, पिता या पति के नाम, खसरा नंबर, रकबा और हिस्सेदारी से जुड़ी जानकारियों में भारी त्रुटियां हैं। कई मामलों में नामांतरण (म्यूटेशन) अपडेट नहीं हुए हैं और ऑनलाइन रिकॉर्ड व जमीनी वास्तविकता में अंतर दिखाई दे रहा है।
किसानों का कहना है कि इन त्रुटियों के कारण उन्हें फिर से पटवारी और तहसील कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, जिससे आर्थिक बोझ और समय की बर्बादी दोनों बढ़ रही हैं। किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि कई रिकॉर्ड में तहसीलदार के हस्ताक्षर अपडेट नहीं होने से दस्तावेज अधूरे दिखाई दे रहे हैं।कांग्रेस नेता मफतलाल बुनकर और क्षेत्र के किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि जिला स्तर पर तकनीकी अधिकारियों की टीम गठित कर राजस्व रिकॉर्ड में मौजूद त्रुटियों को जल्द ठीक कराया जाए, ताकि किसानों को राहत मिल सके।किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो वे धरना-प्रदर्शन और जनआंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। इस दौरान फौज सिंह, हिंदूराम चौधरी, मंगलराम, राहुल माली, जोधाराम, मोतीराम, बलवंत कुमार, मफाराम, करमीराम, टीकमराम, खंगाराम, सुरेश कुमार, महेंद्र कुमार पटेल, हेमाराम माली सहित कई किसान मौजूद रहे।