नव संवत्सर: सनातन की प्रामाणिकता का दिव्य उद्घोष?

वर्ष प्रतिपदा—सिर्फ नववर्ष नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति के गौरवशाली इतिहास का प्रतीक?

जेपी रावत संदेश महल समाचार

नव संवत्सर का महापर्व—गुड़ी पड़वा, वर्ष प्रतिपदा, उगादि, चैत्र नवरात्रि, रामनवमी और हनुमान जयंती—सिर्फ भारतीय नव वर्ष का शुभारंभ नहीं, बल्कि एक स्वर्णिम अवसर भी है! यह समझने और गर्व से स्वीकारने का कि हमारी भारतीय संस्कृति कितनी पुरातन, दिव्य और समृद्धशाली रही है?

विक्रम संवत: जब भारत गढ़ रहा था अपना इतिहास, पश्चिम तब था अज्ञानी?

आइए, पहले विक्रम संवत्सर की बात करें! हिंदू पंचांग के अनुसार, 29 मार्च 2025 की संध्या 4:27 बजे विक्रम संवत 2082 का शुभारंभ होगा, जो 30 मार्च 2025 को मध्यान्ह 12:49 तक रहेगा चूंकि इस दिन सूर्योदय 30 मार्च को होगा, इसलिए वर्ष प्रतिपदा 30 मार्च को ही मनाई जाएगी

क्या आप जानते हैं? हम यह पर्व सम्राट विक्रमादित्य द्वारा स्थापित विक्रम संवत के आधार पर मनाते हैं, जो 2081 वर्षों का स्वर्णिम इतिहास समेटे हुए है?

अब ज़रा सोचिए? जब भारत में विक्रम संवत की शुरुआत हुई, तब पश्चिमी दुनिया ने समय की गणना भी शुरू नहीं की थी?

ईस्वी सन आज 2025 तक पहुंचा है, जबकि हमारा विक्रम संवत इससे भी 57 वर्ष पुराना है?

तो फिर कौन-सी सभ्यता अधिक प्राचीन और उन्नत हुई!? क्या यह प्रमाण नहीं कि भारत की कालगणना पश्चिम से भी अधिक वैज्ञानिक, विस्तृत और प्रमाणिक है?

5000 वर्ष नहीं, भारतीय सभ्यता लाखों वर्षों पुरानी है?

इतिहास गवाह है कि सम्राट विक्रमादित्य भारतीय संस्कृति के पहले शासक नहीं थे उनसे पहले भी, राजा भरत से लेकर पांडु, धृतराष्ट्र और परीक्षित तक असंख्य सम्राटों ने भारतवर्ष पर शासन किया

अब ज़रा गणना करें?

कलियुग की ही बात करें तो यह अभी 5126 वर्ष पुराना हो चुका है
✔ द्वापर युग में, आज से 5124 वर्ष पूर्व, महाराज युधिष्ठिर का राज्याभिषेक वर्ष प्रतिपदा के दिन ही हुआ था
✔ त्रेता युग की गणना करें, तो वह 12 लाख 96 हजार वर्षों से अधिक हो चुका है?
✔ सतयुग की बात करें, तो उसे 17 लाख 28 हजार वर्ष से भी अधिक समय बीत चुका है?

अब बताइए? क्या हमारी सनातन संस्कृति केवल 5000 साल पुरानी है? नहीं? यह तो लाखों वर्षों से संपूर्ण विश्व का मार्गदर्शन कर रही है?

विदेशी आक्रमणों के बावजूद मिटा नहीं सनातन, क्योंकि यह अनश्वर है?

इतनी पुरातन और उन्नत संस्कृति को नष्ट करने की कोशिशें क्यों की गईं?

क्या आपको नहीं लगता कि विदेशी आक्रांताओं ने हमारे गौरवशाली इतिहास को मिटाने का षड्यंत्र रचा?

⚔ उन्होंने हमारे मंदिर ध्वस्त किए
⚔ हमारे ग्रंथों को जलाया
⚔ हमारे इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश किया

लेकिन क्या वे हमारी संस्कृति को नष्ट कर पाए? बिल्कुल नहीं?

आज भी जब पुरातात्विक खुदाइयों में हजारों साल पुराने विकसित नगरों के प्रमाण मिलते हैं, तो क्या यह सिद्ध नहीं होता कि भारतीय सभ्यता से प्राचीन कोई अन्य सभ्यता है ही नहीं?

वर्ष प्रतिपदा—सनातन संस्कृति की अमरता का संदेश?

वर्ष प्रतिपदा केवल नववर्ष का उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की अमरता, गौरव और दिव्यता का उद्घोष है?

यह दिन हमें गर्व से कहने का अवसर देता है—

✨ हम भारतीय हैं!
✨ हमारी संस्कृति अनंतकाल से थी, है और सदा रहेगी!
✨ भारत ही विश्वगुरु था, है और रहेगा?

तो आइए, अपने गौरवशाली अतीत को स्मरण करें और अपनी सनातन संस्कृति पर गर्व करें?

हर सनातनी को वर्ष प्रतिपदा की हार्दिक शुभकामनाएं!?

 

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