✍ डॉ. उदय शंकर अवस्थी
प्रबंध निदेशक इफको
भारत का सहकारिता आंदोलन सिर्फ एक आर्थिक पहल नहीं, बल्कि समावेशी विकास और सामुदायिक सशक्तिकरण का प्रतीक है। यह गांव-गांव तक आर्थिक आत्मनिर्भरता की रोशनी फैलाने वाला एक अभूतपूर्व प्रयास है। जब 6 जुलाई 2021 को सहकारिता मंत्रालय की स्थापना हुई, तो यह न केवल एक नीतिगत निर्णय था, बल्कि भारत के सहकारी आंदोलन को एक नई दिशा देने वाला ऐतिहासिक क्षण भी था।
सरकार का यह कदम सहकारी समितियों को सशक्त बनाने, कानूनी सुधारों को लागू करने और सहकारिता को नवाचार व डिजिटल युग से जोड़ने की प्रतिबद्धता का प्रमाण है! अब हर गांव, हर पंचायत और हर किसान इस बदलाव का हिस्सा बन सकता है! क्या यह किसी क्रांति से कम है।
दूरदर्शी नेतृत्व के तहत सहकारिता की नई परिभाषा।
माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी के नेतृत्व में, भारत का सहकारी आंदोलन नए आयाम छू रहा है! उनके कुशल मार्गदर्शन में सहकारिता को संगठित, पारदर्शी और आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं—
✅ सहकारिता को डिजिटल क्रांति से जोड़ना।
PACS (प्राथमिक कृषि साख समितियां) का कम्प्यूटरीकरण करके, उन्हें सामान्य सेवा केंद्र (CSC) के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे गांवों में 300+ डिजिटल सेवाएं उपलब्ध होंगी।
✅ गांव-गांव में सहकारी समितियां। सरकार ने 9,000+ नई PACS, डेयरी और मत्स्य सहकारी समितियां स्थापित करने का निर्णय लिया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर खुलेंगे
✅ नई बहुराज्य सहकारी सोसाइटीज!
राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (NCEL)—सहकारी उत्पादों के वैश्विक निर्यात को बढ़ावा।
भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (BBSSL)—एकल ब्रांड के तहत बेहतर गुणवत्ता वाले बीजों का उत्पादन और वितरण।
राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (NCOL)—जैविक कृषि उत्पादों के उत्पादन और विपणन में नई क्रांति।
✅ सहकारी चीनी मिलों को सशक्त करना। ₹10,000 करोड़ की ऋण योजना के तहत इथेनॉल उत्पादन और कोजेन पावर प्लांट्स को प्राथमिकता दी जा रही है।
✅ भंडारण की क्रांति। दुनिया की सबसे बड़ी विकेन्द्रीकृत अनाज भंडारण योजना सहकारी क्षेत्र में लागू की जा रही है, जिससे किसानों को भंडारण की बेहतर सुविधा मिलेगी और खाद्यान्न अपव्यय में भारी कमी आएगी।
सहकारिता मंत्रालय की ऐतिहासिक उपलब्धियां।
63,000 PACS को कम्प्यूटरीकृत करने के लिए ₹2,516 करोड़ की ऐतिहासिक योजना शुरू की गई, जिससे—
✔ 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 62,318 PACS को जोड़ा गया।
✔ 15,783 PACS पहले ही इस योजना में शामिल हो चुकी हैं।
✔ इससे PACS को नाबार्ड से जोड़ा गया, जिससे निर्बाध वित्तीय लेनदेन संभव हुआ।
इसके अतिरिक्त—
✔ 2,000 PACS को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में विकेन्द्रीकृत अनाज भंडारण योजना के लिए चयनित किया गया।
✔ 30,647 PACS को CSC (सामान्य सेवा केंद्र) का दर्जा दिया गया।
इफको: कृषि में क्रांतिकारी योगदान
इफको ने सहकारी आंदोलन में नया इतिहास रचा।नैनो यूरिया प्लस (तरल) और नैनो डीएपी (तरल) जैसे अत्याधुनिक नैनो उर्वरकों का विकास करके, इफको ने भारतीय किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन की ताकत दी है।
➡ इन उत्पादों ने सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि अमेरिका, ब्राजील, जाम्बिया, गिनी-कोनाक्री, मॉरीशस, रवांडा, मलेशिया और फिलीपींस में भी अपनी पहचान बना ली है।
➡ इफको आज दुनिया की नंबर 1 सहकारी समिति है।यह सिर्फ एक संगठन नहीं, बल्कि सतत कृषि और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने वाला एक क्रांतिकारी आंदोलन है
त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय: सहकारी विकास का उत्प्रेरक
भारत में सहकारिता को और सशक्त बनाने के लिए त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना की जा रही है
➡ यह विश्वविद्यालय सहकारी शिक्षा, अनुसंधान और नेतृत्व विकास के लिए समर्पित होगा
➡ कृषि, मत्स्य पालन, डेयरी, बैंकिंग और विपणन जैसे क्षेत्रों में तकनीकी और प्रबंधकीय शिक्षा प्रदान करेगा
➡ विशिष्ट प्रशिक्षण कार्यक्रमों और डिप्लोमा कोर्सों के माध्यम से सहकारी नेताओं और उद्यमियों को तैयार करेगा
यह सिर्फ एक विश्वविद्यालय नहीं, बल्कि भारत के सहकारी भविष्य का मार्गदर्शक होगा
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की सहकारिता को पहचान
संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 2025 को ‘अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष’ घोषित किया गया।यह इस बात का प्रमाण है कि सहकारी मॉडल वैश्विक आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
सहकारिता मंत्रालय इस अवसर का उपयोग गरीबी उन्मूलन, सतत विकास और आर्थिक समावेशन को बढ़ावा देने के लिए करेगा।कई वैश्विक सम्मेलन और कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे,जिससे भारत का नेतृत्व सहकारी क्षेत्र में और मजबूत होगा।
निष्कर्ष: सहकारिता से आत्मनिर्भर भारत की ओर
आज सहकारी आंदोलन भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बन चुका है! सरकार की रणनीतिक पहलें, डिजिटल क्रांति, त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय और इफको के नवाचार भारत को दुनिया का सहकारी महाशक्ति बनाने की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं
अब वक्त है हर भारतीय को इस आंदोलन का हिस्सा बनने का।यह सिर्फ एक आर्थिक पहल नहीं, बल्कि हमारे समृद्ध भविष्य की नींव है।