✍ जेपी रावत
प्रबंध निदेशक ‘संदेश महल’ समाचार
ऑपरेशन ब्रह्म’ आपदा में भारत की संवेदनशीलता और वैश्विक जिम्मेदारी
म्यांमार में आए भीषण भूकंप के बाद भारत ने ‘ऑपरेशन ब्रह्म’ के तहत त्वरित राहत अभियान शुरू किया है। भारतीय नौसेना के जहाजों की तैनाती, विशेष चिकित्सा दल की एयरलिफ्टिंग और NDRF की हाई-टेक बचाव टीमों की तैनाती दर्शाती है कि भारत सिर्फ एक पड़ोसी देश नहीं, बल्कि आपदा प्रबंधन और मानवीय सहायता में वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभाने वाला राष्ट्र बन चुका है।
आपदा में भारत की तत्परता
भारत ने बार-बार यह साबित किया है कि संकट के समय वह न केवल अपने नागरिकों, बल्कि अपने पड़ोसी देशों और वैश्विक समुदाय के लिए भी एक मजबूत सहयोगी है। नेपाल में 2015 का भूकंप हो, तुर्की में हालिया आपदा हो, या अब म्यांमार में भूकंप—भारत की त्वरित प्रतिक्रिया इसकी वैश्विक जिम्मेदारी के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
‘ऑपरेशन ब्रह्म’ की रणनीति क्यों अहम?
1. तेज़ प्रतिक्रिया: नौसेना के जहाजों और चिकित्सा दल की तत्काल तैनाती दर्शाती है कि भारत आपदा प्रबंधन में तेजी और दक्षता के साथ काम कर रहा है।
2. तकनीकी सशक्तिकरण: NDRF की टीमें उन्नत उपकरणों के साथ राहत कार्यों में जुटी हैं, जिससे मलबे में फंसे लोगों को बचाने की संभावना बढ़ जाती है।
3. राजनयिक मजबूती: यह अभियान भारत-म्यांमार संबंधों को और मजबूत करेगा, जिससे दोनों देशों के बीच सहयोग को नई गति मिलेगी।
भारत का वैश्विक दृष्टिकोण
आज जब कई राष्ट्र अपनी आंतरिक नीतियों और सीमित हितों में उलझे हुए हैं,भारत ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ के सिद्धांत पर चलते हुए वैश्विक जिम्मेदारी निभा रहा है। यह सिर्फ मानवीय सहायता नहीं,बल्कि भारत की सॉफ्ट पावर का विस्तार भी है, जो उसे एक विश्वसनीय और जिम्मेदार शक्ति के रूप में स्थापित कर रहा है।
क्या यह एक नई विदेश नीति का संकेत है?
‘ऑपरेशन ब्रह्म’ सिर्फ एक आपदा राहत अभियान नहीं, बल्कि भारत की विदेश नीति में एक स्पष्ट बदलाव का संकेत भी है। यह दर्शाता है कि भारत अब केवल क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर एक प्रभावी नेतृत्वकर्ता के रूप में उभर रहा है।
निष्कर्ष
म्यांमार में ‘ऑपरेशन ब्रह्म’ केवल राहत और बचाव कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के मानवीय दृष्टिकोण, उसकी रणनीतिक सोच और वैश्विक नेतृत्व क्षमता का प्रमाण है। यह अभियान न केवल म्यांमार के लिए जीवनरक्षक साबित होगा,बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भारत की छवि को और अधिक सशक्त बनाएगा।