प्रतिमा विसर्जन के दौरान हुए हत्याकांड में सरफराज को फांसी नौ दोषियों को उम्रकैद

रणजीत सिंह
बहराइच संदेश महल
महराजगंज बाजार में पिछले वर्ष दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान भड़की हिंसा में मारे गए रामगोपाल हत्या कांड का फैसला गुरुवार को सुनाया गया। अदालत ने मुख्य आरोपी सरफराज को फांसी की सजा सुनाई है, जबकि नौ अन्य दोषियों को आजीवन कारावास दिया गया है। पूरे प्रकरण में सबसे अहम भूमिका उन 12 प्रत्यक्षदर्शी गवाहों की रही, जिन्होंने अदालत के सामने घटना का आंखों देखा हाल स्पष्ट और बेझिझक तरीके से बयान किया। इन्हीं गवाहियों ने अभियोजन पक्ष को मजबूती प्रदान की और मामले को निर्णायक मोड़ तक पहुंचाया।सरकारी स्तर पर भी मामले पर लगातार नजर रखी जा रही थी। घटना के तुरंत बाद सभी नामजद आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आ गए थे। कई बार पुलिस और आरोपियों के बीच मुठभेड़ भी हुई। विवेचना अधिकारी ने साक्ष्यों को इकट्ठा करते हुए मात्र तीन महीनों में आरोपपत्र तैयार कर 11 जनवरी 2025 को अदालत में दाखिल कर दिया। इसके बाद 18 फरवरी को आरोप तय हुए और चार मार्च 2025 से गवाहों की बयानबाजी शुरू हुई।
करीब आठ महीने की सुनवाई के दौरान 12 गवाह अदालत में पेश हुए। इनमें मृतक रामगोपाल के भाई हरमिलन मिश्रा, अभिषेक मिश्रा, शशि भूषण और राजन की गवाही सबसे मजबूत मानी गई। बाकी आठ गवाहों के बयान भी आरोपियों के खिलाफ निर्णायक साबित हुए। सभी गवाह घटना के समय मौके पर मौजूद थे और उन्होंने क्रमवार बताया कि 13 अक्तूबर 2024 को महराजगंज में आखिर क्या हुआ था।मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, जिले मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर महराजगंज बाजार में शाम करीब छह बजे दुर्गा प्रतिमा विसर्जन का जुलूस निकाला जा रहा था। इसी दौरान दूसरे पक्ष ने डीजे बंद करने की मांग को लेकर विवाद खड़ा कर दिया। देखते ही देखते स्थिति बिगड़ती गई और पथराव शुरू हो गया। माहौल तनावपूर्ण होते ही दोनों तरफ से हिंसा भड़क उठी। इसी अफरातफरी में रामगोपाल पर घातक हमला किया गया, जिसमें उनकी मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव फैल गया था और कई जगह आगजनी भी हुई थी।लगातार 13 महीने 26 दिनों तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने गुरुवार को अपना फैसला सुनाया। अदालत ने माना कि गवाहों के बयान और पेश किए गए साक्ष्य आरोपियों के अपराध को स्पष्ट सिद्ध करते हैं। मुख्य आरोपी को फांसी और नौ अन्य को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के साथ ही यह मामला अभियोजन पक्ष की एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।