140 साल पुराना पारीछा बांध बना विश्व धरोहर, फ्रांस में मिलेगा सम्मान

जेपी रावत
झांसी संदेश महल समाचार
बुंदेलखंड की सिंचाई व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण 140 साल पुराना पारीछा बांध अब वैश्विक विरासत का हिस्सा बन गया है। इंटरनेशनल कमीशन ऑन इरिगेशन एंड ड्रेनेज (आईसीआईडी) ने झांसी के पारीछा बांध को वर्ल्ड हेरिटेज इरिगेशन स्ट्रक्चर्स (WHIS) के रूप में मान्यता दी है। इसके लिए बांध को फ्रांस में आयोजित होने वाली आईसीआईडी की अंतरराष्ट्रीय कांग्रेस में WHIS अवार्ड-2026 से सम्मानित किया जाएगा।
प्रमुख सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन अनिल गर्ग के मुताबिक, 13 अगस्त को विभाग को आईसीआईडी की ओर से पत्र मिला है। इसमें बताया गया है कि पारीछा बांध को 14 अक्टूबर को फ्रांस के मार्सेई में होने वाली 26वीं आईसीआईडी इंटरनेशनल कांग्रेस और 77वीं इंटरनेशनल एग्जीक्यूटिव काउंसिल मीटिंग के दौरान सम्मानित किया जाएगा। समारोह के लिए विभागीय अधिकारियों को आमंत्रित किया गया है।

बेतवा नदी पर बना है ऐतिहासिक बांध

पारीछा बांध बेतवा नदी पर बना है और करीब 140 वर्षों से बुंदेलखंड के सूखे इलाकों में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह बेतवा नहर प्रणाली का प्रमुख हिस्सा है। इसकी लंबाई करीब 1,174 मीटर और नदी तल से ऊंचाई लगभग 16.8 मीटर है।
बांध में 318 स्टील गेट लगाए गए हैं। इनकी मदद से पानी को नियंत्रित कर आवश्यकता के अनुसार छोड़ा जाता है। पिछले वर्षों में बांध की जल भंडारण क्षमता में भी वृद्धि की गई है। पहले इसकी क्षमता करीब 1,700 मिलियन क्यूबिक फीट थी, जिसे बढ़ाकर लगभग 2,400 मिलियन क्यूबिक फीट कर दिया गया।
यूपी और एमपी के इलाकों को सिंचाई का लाभ
पारीछा बांध से उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई क्षेत्रों को सिंचाई का लाभ मिलता है। बारिश के मौसम में बांध के गेट खुलने पर यहां का विहंगम दृश्य पर्यटकों को भी आकर्षित करता है।
इसके अलावा पारीछा बांध से थर्मल पावर परियोजना को भी पानी उपलब्ध कराया जाता है। इस परियोजना की बिजली उत्पादन क्षमता करीब 920 मेगावाट है।

140 साल बाद भी मजबूती से दे रहा सेवा

करीब डेढ़ सदी पुराना होने के बावजूद पारीछा बांध आज भी सिंचाई और जल प्रबंधन की महत्वपूर्ण जरूरतों को पूरा कर रहा है। विश्व धरोहर सिंचाई संरचना के रूप में इसकी मान्यता बुंदेलखंड की ऐतिहासिक जल प्रबंधन तकनीक और इंजीनियरिंग क्षमता को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाली उपलब्धि मानी जा रही है।