भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर मुख्यमंत्री योगी ने किया जनजातीय भागीदारी उत्सव का शुभारंभ

22 राज्यों के 600 से अधिक जनजातीय कलाकारों की सहभागिता से लखनऊ बना सांस्कृतिक एकता का केंद्र

लखनऊ संदेश महल
लोकनायक ‘धरती आबा’ भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के पावन अवसर पर राजधानी लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में गुरुवार को छह दिवसीय ‘जनजातीय भागीदारी उत्सव’ का शुभारंभ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह तथा समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में देशभर के 22 राज्यों से आए लगभग 600 जनजातीय कलाकारों ने भाग लिया। मुख्यमंत्री ने ढोल की थाप पर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और भगवान बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से 1 से 15 नवंबर तक पूरे देश में ‘जनजातीय गौरव पखवाड़ा’ मनाया जा रहा है, ताकि जनजातीय समाज अपनी परंपरा, संस्कृति, व्यंजन, कला और संगीत पर गर्व का अनुभव कर सके।

सीएम योगी ने कहा कि लखनऊ में आयोजित यह उत्सव देश की विविध संस्कृतियों का अद्भुत संगम है। इस वर्ष आयोजन का सहभागी राज्य अरुणाचल प्रदेश है। उन्होंने कहा कि यह वर्ष भारत के इतिहास के स्वर्णिम अध्यायों से आलोकित है, क्योंकि यह भगवान बिरसा मुंडा, लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल और ‘वंदे मातरम्’ राष्ट्रगीत — इन तीनों की 150वीं जयंती का वर्ष है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि धरती आबा बिरसा मुंडा ने मात्र 25 वर्ष की आयु में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी और देश को स्वतंत्रता व आत्मसम्मान का संदेश दिया।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में यह आयोजन एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने बताया कि 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पूरे देश में ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाई जाएगी। राज्य सरकार वनटांगिया, वनवासी और घुमंतू समाजों के उत्थान के लिए सतत कार्य कर रही है।

राज्यमंत्री असीम अरुण ने कहा कि यह उत्सव भारत की सामासिक संस्कृति का जीवंत प्रतीक है, जिसमें विभिन्न जनजातियों की जीवनशैली, पारंपरिक शिल्प, लोककला, संगीत और खानपान की झलक एक मंच पर दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की प्रकृति-आस्था, सामाजिक सहयोग और आत्मनिर्भरता की परंपरा इस आयोजन की आत्मा है।

उद्घाटन समारोह के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विभिन्न राज्यों के स्टॉलों का अवलोकन किया। कार्यक्रम में विधान परिषद सदस्य सुभाष यदुवंश, अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग के अध्यक्ष बैजनाथ रावत, उपाध्यक्ष जीत सिंह खरवार, बेचन राम, तथा अपर मुख्य सचिव समाज कल्याण एल. वेंकटेश्वर सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के सांस्कृतिक सत्र में देशभर से आए कलाकारों ने अपनी लोक परंपराओं की झलक प्रस्तुत की। अरुणाचल प्रदेश के सिरदपिन जनजाति के कलाकारों ने याक नृत्य, गालो जनजाति ने युद्ध नृत्य, छत्तीसगढ़ के कलाकारों ने मांदरी नृत्य, राजस्थान के भवरु खान लंगा दल ने मांड गायन और कालबेलिया नृत्य, जबकि उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले से आए दल ने शैला और कर्मा नृत्य प्रस्तुत किया।

इसके अलावा ओडिशा की डुरुआ जनजाति, असम, गुजरात, मध्य प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र के कलाकारों की प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। उद्घाटन के बाद निकाली गई शोभा यात्रा में देशभर की जनजातीय संस्कृति की विविध झलकियों ने लखनऊ की सड़कों को उत्सवमय बना दिया।