गोचर भूमि पर बनी पंचायत की दुकानों से लाखों की आय का नुकसान, जिम्मेदारों की आंखें बंद

हीराराम सैन रेवदर सिरोही राजस्थान संदेश

पंचायत समिति रेवदर की ग्राम पंचायत मकावल में वर्ष 2013-14 में मकावल भटाना रोड पर बनाइ थीं। पांच दुकानों का निर्माण किया गया था। इन दुकानों का उद्देश्य स्थानीय छोटे व्यापारियों को आवंटित कर ग्राम पंचायत की निजी आय बढ़ाना था, लेकिन पिछले लगभग 12 वर्षों से दुकानें निजी व्यक्तियों द्वारा संचालित होने के बावजूद उनका विधिवत आवंटन नहीं हुआ और न ही किराया पंचायत खाते में जमा कराया गया।
जानकारी के अनुसार एक दुकान का मासिक किराया लगभग 1000 रुपये निर्धारित माना जाए तो पांच दुकानों से प्रति माह करीब 5000 रुपये तथा प्रतिवर्ष लगभग 60 हजार रुपये की आय होनी चाहिए थी। 12 वर्षों में यह राशि लगभग 7.20 लाख रुपये तक पहुंचती है, जो पंचायत को प्राप्त नहीं हुई।
मामले में मकावल पटवारी मनीष कुमार राणा ने बताया कि पंचायत की ये दुकानें गोचर भूमि पर निर्मित हैं। गोचर भूमि पर बनी दुकानों का आवंटन नियमों के विरुद्ध है, इसलिए वर्तमान स्थिति में उनका विधिवत आवंटन नहीं किया जा सकता।
वहीं ग्राम विकास अधिकारी रमेश कुमार सुथार ने कहा कि आगामी ग्राम सभा में प्रस्ताव लाकर दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। साथ ही बकाया किराए का निर्धारण कर संबंधित व्यक्तियों को नोटिस जारी कर वसूली की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि दुकानों को गोचर भूमि से आबादी भूमि में परिवर्तित कराने के लिए भी प्रस्ताव लिया जाएगा।
दुकानों में विद्युत कनेक्शन के संबंध में सरपंच प्रतिनिधि प्रकाश कुमार ने कहा कि बिजली कनेक्शन जारी करने से पहले विद्युत विभाग को भूमि एवं दस्तावेजों का सत्यापन करना चाहिए। उनके अनुसार विद्युत कनेक्शन की फाइल में पंचायत की दुकानों संबंधी एनओसी नहीं दी गई थी, बल्कि आबादी भूमि से संबंधित दस्तावेज लगाए गए थे। यदि लाइनमैन द्वारा मौके की लोकेशन में परिवर्तन किया गया है तो इसमें ग्राम पंचायत की कोई गलती नहीं है।पटवारी मनीष कुमार राणा ने स्पष्ट किया कि गोचर भूमि पर स्थित दुकानों का न तो आवंटन किया जा सकता है और न ही विद्युत कनेक्शन जारी किया जाना नियमसम्मत है। यदि ऐसा हुआ है तो इसकी जांच होनी चाहिए।