गौरव गुप्ता
सीतापुर संदेश महल समाचार
जनपद सीतापुर की पॉक्सो एक्ट अदालत ने एक हृदयविदारक मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दोषी को मृत्युदंड की सजा सुनाई। रिश्ते की सात वर्षीय मासूम भतीजी को अगवा कर दुष्कर्म करने और फिर हत्या कर शव सरायन नदी में फेंक देने के जुर्म में दोषी नीतू को फांसी की सजा दी गई। अदालत ने दोषी पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। यह फैसला न्यायाधीश भगीरथ वर्मा ने सुनाया। अदालत का आदेश अब परीक्षण के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजा गया है।
ऐसे सामने आया सनसनीखेज मामला
यह जघन्य वारदात बीते जनवरी माह की है। अभियोजन पक्ष के अनुसार 14 जनवरी को पीड़िता के पिता ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनकी सात वर्षीय बेटी अचानक लापता हो गई है। जांच में खुलासा हुआ कि बालिका को रिश्ते में लगने वाले नीतू ने अगवा कर अपने घर ले गया। वहां उसने मासूम से दुष्कर्म किया। हालत बिगड़ने पर नीतू ने अपने एक सहयोगी की मदद से बच्ची की हत्या कर दी और शव को सरायन नदी में फेंक दिया।
पुलिस ने ऐसे खोला राज़
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष टीम गठित की। नीतू को कचनार चौराहे से गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उसने अपराध स्वीकार किया और अपनी निशानदेही पर बालिका के जूते बरामद कराए। पुलिस ने ठोस सबूतों के साथ चार्जशीट अदालत में दाखिल की।
अदालत ने सुनाई मौत की सजा
लंबी सुनवाई के बाद पॉक्सो एक्ट कोर्ट ने दोषी नीतू को मृत्युदंड की सजा सुनाई। अदालत ने यह माना कि मासूम बच्ची के साथ घटित यह अपराध अत्यंत जघन्य है, और समाज में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कठोरतम दंड दिया जाना आवश्यक है।
अभियोजन पक्ष ने रखा मजबूती से पक्ष
शासकीय अधिवक्ता गोविंद मिश्र और सहायक शासकीय अधिवक्ता गौरव मिश्र ने अदालत में पूरे मामले की पैरवी की। गौरव मिश्र ने बताया कि अदालत ने नीतू को दोषी मानते हुए मृत्युदंड और पचास हजार रुपये अर्थदंड की सजा दी है। यह फैसला परीक्षण के लिए हाईकोर्ट भेजा गया है।
फैसले पर छलक पड़े आंसू
फैसला सुनते ही अदालत कक्ष का माहौल भावुक हो उठा। दोषी नीतू की मां रामदेवी की आंखों से आंसू बह निकले। उन्होंने अदालत से बाहर निकलते हुए कहा कि उनका बेटा निर्दोष है। उनका दावा है कि घटना के दिन नीतू उनके साथ लखनऊ में था और किसी अन्य व्यक्ति ने वारदात को अंजाम देकर उनके बेटे को फंसा दिया।