मैम का मानदेय घोटाला एक नौकरी मानदेय तीन

पढ़ाने न जाने की शर्त पर मैम ने दे डाली लाखों की रिश्वत

आखिर कौन है वह मैम जिसने खेला तिहरे मानदेय का खेल

बीएसए ने कौन सी की कार्यवाही जिससे गयी नौकरी और हुई जेल

रिपोर्ट
बलराम
लखीमपुर-खीरी संदेश महल समाचार से

उत्तर प्रदेश के जिला लखीमपुर-खीरी अंतर्गत बिजुआ ब्लॉक में मानदेय में की जा रही हेराफेरी का मामला प्रकाश मे आया जहां कार्यरत अनुदेशिका एक नौकरी कर तीन लोगों का मानदेय ले रही है।जिसमें से दो मानदेय फर्जी शिक्षामित्रों के नाम से थे। तीनों का मानदेय एक ही खाता नंबर पर भेजा जा रहा था। यह खेल नया नहीं है लगभग दो वर्षों से इस खेल को बाखूबी अमल में लाया जा रहा था।खुलासा उस समय हुआ जब मानव संपदा पोर्टल पर फीडिंग दौरान एक ही पेन कार्ड और खाता संख्या सामने आने पर लखनऊ से मामला पकड़ में आ गया। बीएसए ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराई तो ब्लॉक के सहायक लेखाकार के माध्यम से फर्जी शिक्षामित्रों के नाम पर राशि गबन होने की बात सामने आई। बीएसए ने सहायक लेखाकार को निलंबित कर बीईओ को रिपोर्ट दर्ज कराने के आदेश दे दिया है।

गौरतलब हो कि जिला लखीमपुर-खीरी अन्तर्गत बिजुआ ब्लॉक के पूर्व माध्यमिक विद्यालय फूलपुर में तैनात अनुदेशिका वंदना कुशवाहा की नियुक्ति वर्ष 2013 में पल्हनापुर पूर्व माध्यमिक विद्यालय में हुई थी। बाद इसके वंदना का स्थानांतरण 2019-20 में पूर्व माध्यमिक विद्यालय फूलपुर में हो गया। और प्रथम सत्र 2018-19 से वंदना का इस तिहरे मानदेय का खेल शुरू हुआ।वंदना के अनुदेशिका मानदेय के लिए बिजुआ स्थित इंडियन बैंक में चल रहे खाते में नवंबर 2018 से सर्व शिक्षा अभियान के तहत गोंधिया प्राइमरी स्कूल में कार्यरत शिक्षामित्र पद का मानदेय 10 हजार रुपये प्रतिमाह आना शुरू हुआ। फिर क्या मैम जी की तो बल्ले-बल्ले होना शुरू हो गई। कुछ समय गुजरा कि
सत्र के अक्तूबर 2018 से मार्च 2019 तक का छह माह का एकमुश्त मानदेय 60 हजार की एडवाइज बेसिक शिक्षामित्र मद से भेजी गई। चोरी भी की और पकड़ी भी नहीं गयी। फिर क्या अनुदेशिका महोदया को उसके पद के अलावा दो अन्य स्कूलों में शिक्षामित्र दिखाकर बेसिक और सर्व शिक्षा अभियान का मानदेय 20 हजार रुपये महीना आना शुरू हो गया। एक अनुदेशिका तीन मानदेय यह सिलसिला अनवरत जारी रहा।
यह तो तय है कि विभागीय कर्मचारी की मिली भगत के बगैर खेल को खेलना मुमकिन नहीं था। जब जांच की परतें खुलना शुरू हुई तो बिजुआ ब्लॉक के सहायक लेखाकार रमाकांत वर्मा का नाम और काम सामने आ गया।
प्रकरण के संबंध में राज्य परियोजना निदेशक ने 18 अगस्त, 2020 को पत्र भेजकर बीएसए को  मामले में कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। बीएसए बुद्धप्रिय सिंह ने आरोपी अनुदेशिका के बयान लिए तो पता चला कि उसे सहायक लेखाकार रमाकांत ने कहा कि उसके खाते में जो पैसा आए वह उसे वापस कर दे। उसके बदले में उसे स्कूल आने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस समझौते में अनुदेशिका के खाते में सर्व शिक्षा अभियान का नवंबर-2018 से एक लाख 79 हजार 277 रुपये, जबकि बेसिक शिक्षा मद से एक लाख 89 हजार 680 रुपये मानदेय कुल तीन लाख 69 हजार 377 रुपये भेजे गए।
वंदना के मुताबिक पहले उसने रुपये नकद दिए। बाद में जून 2019 से जून 2020 तक आरोपी लेखाकार ने अपने निजी बैंक खाते में अनुदेशिका से दो लाख 14 हजार 187 रुपये जमा कराए। बीएसए ने जब बैंक स्टेटमेंट निकलवाए तो मामला पकड़ा गया।
बीएसए बुद्ध प्रिय के अनुसार आरोपी सहायक लेखाकार के खिलाफ निलंबन कर एफ आई आर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।आरोपी लेखाकार की सेवा समाप्ति की कार्रवाई की जाएगी।अनुदेशिका और आरोपी रमाकांत से गबन किए गए पैसे की वसूली कराने के आदेश जा चुके हैं।

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