पुलिस ने पकड़ा हाईटेक जुआड़खाना, जहां होते थे लाखों के वारे न्यारे

रिपोर्ट
जेपी रावत
संदेश महल समाचार

सन 1999 में रिलीज फिल्म बादशाह की तरह हीरोगीरी करके तास के पत्तों के खेल खेलने के दौरान चश्मे और दूसरी डिवाइस की मदद से बड़े-बड़े दांव जीतने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है।

इस जुगाडखाने का सरगना गिरफ्त से बाहर है वहीं मौके से पुलिस ने एक दर्जन से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है।

बताते चलें कि हाईटेक जुआ बाबूपुरवा कालोनी में पकड़ा गया है। जुआ खिलाने वाला सरगना अपने साथियों को डिवाइस, स्कैनर आदि पकड़ा देता था। इसकी मदद से उसके साथी मोटी रकम जीतते थे। इसके बदले सरगना जीत की रकम का 40 प्रतिशत हिस्सा खुद रखता था।पुलिस ने 14 जुआरियों को गिरफ्तार कर इस हाईटेक जुआड़खाने का खुलासा किया है। हालांकि सरगना अभी फरार है। डीआईजी डॉ. प्रीतिंदर सिंह ने प्रेसवार्ता कर बताया कि बाबूपुरवा कालोनी में रिंकू गुप्ता के मकान में कई सालों से हाईटेक जुआ खेला जा जा रहा था।सूचना पर एसपी साउथ दीपक भूकर ने बाबूपुरवा सीओ आलोक सिंह व थाने की पुलिस के साथ छापा मारकर जुआरियों को गिरफ्तार किया। मौके से दो लाख 25 हजार 700 रुपये नकद,आठ पैकेट में भरी कई सारी इलेक्ट्रानिक डिवाइस,चाभी, मोबाइल और चश्मानुमा,पांच ब्लूटूथ, केमिकल युक्त ताश की 93 गड्डी, आठ इलेक्ट्रानिक कैमरे, कैमरे युक्त चार घड़ियां, सेंसर डिवाइस, पांच चार्जर, फिटनेस बॉक्स, लेंस, केमिकल भरी छह शीशी और 17 मोबाइल बरामद किए हैं। एसपी साउथ ने डिवाइस का इस्तेमाल करने का डेमो भी दिया। सरगना अजमत उर्फ आजम फरार है। यह नौबस्ता थाना क्षेत्र की उस्मानपुर कालोनी का रहने वाला है। मौके से पुलिस ने
लतीफ,निवासी बाबूपुरवा,रिंकू गुप्त निवासी बाबूपुरवा,दुर्गेश निवासी गोविंदनगर,विनीत निवासी बगाही,कमल यादव निवासी किदवईनगर,अजय शुक्ला निवासी कल्याणपुर,रवि पाल निवासी बारादेवी,सुरेंद्र पाल निवासी जूही,नीरज गुप्ता निवासी श्यामनगर,वैभव गुप्ता निवासी जूही कला,कृष्ण मुरारी निवासी बारादेवी,मनीष निवासी गोविंदनगर,विक्की सिंह निवासी बाबूपुरवा,आलोक श्रीवास्तव निवासी गुजैनी को गिरफ्तार किया है। इस खेल को खेल करता था सरगना और उसके साथी सेंसरयुक्त डिवाइस, कैमरे आदि उपकरण सरगना अजमत अपने साथियों को देता था। चाभी और मोबाइलनुमा ये डिवाइस उसके साथी जुआं खेलने के दौरान पास में ही रख लेते थे। ये डिवाइस ब्लूटूथ से जुड़ी होती थीं। केमिकल युक्त तास की गड्डी जैसे ही डिवाइस के पास रखी जाती, डिवाइस सारे पत्ते स्कैन कर लेती थी। इसके बाद जब खेल शुरू होता था तो उन्हें ब्लूटूथ के माध्यम से पता चल जाता था कि कौन सा पत्ता बाहर गिरेगा और कौन सा पत्ता अंदर। यह भी जान लेते कि किसके पास कौन से पत्ते हैं। इसके हिसाब से ही ये लोग दांव लगाते थे। सरगना इन डिवाइस को 20 हजार रुपये प्रतिदिन के हिसाब से किराये पर भी देता था।डीआईजी ने बताया कि अमूमन ये डिवाइस चाईना,ताइवान,हांगकांग,इंडोनेशिया जैसे देशों से आती हैं। हालांकि सरगना अजमत ये डिवाइस दिल्ली से खरीदकर लाता था। मोबाइलनुमा दिखने वाली डिवाइस 80 हजार की, घड़ी वाली 20 हजार तक की है। इसके अलावा स्कैनर 20 हजार का, पर्सनुमा डिवाइस 25 हजार की, चाभीनुमा डिवाइस 15 हजार की, फोर जी चश्मा 15 हजार का, पावर बैंक 20 हजार का। पूछताछ में पता चला कि डिवाइस से जुआ खिलाने की जानकारी सरगना को यू-ट्यूब से मिली थी। खराब डिवाइस की सरगना खुद ही मरम्मत कर लेता था। ताश की गड्डियां भी 4जी और 5जी थीं। इसकी मदद से डिवाइस इन्हें झट से स्कैन कर लेती थी। जिस केमिकल का इस्तेमाल गड्डी में किया जाता था,उसकी एक शीशी आठ हजार रुपये की आती है।सरगना डिवाइस के जरिए सैकड़ों को कंगाल कर चुका है। डिवाइस तास की पत्तियों को स्कैन कर कोड वर्ड वन-वन और टू-टू के जरिए पत्ते की जानकारी दे देती थी।डीआईजी डॉ. प्रीतिंदर सिंह ने बताया किस सरगनाकी तलाश की जा रही है। फरार सरगना के ऊपर 25 हजार का इनाम भी घोषित किया गया है।

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