महराजगंज काठमांडू संदेश महल
नेपाल में केपी शर्मा ओली सरकार द्वारा सोशल मीडिया के 26 एप्लिकेशन पर बैन लगाए जाने के बाद देशभर में विरोध की लहर दौड़ गई है। खासकर युवाओं ने सरकार के इस फैसले को ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला’ बताया और राजधानी काठमांडू से लेकर भैरहवा और बुटवल तक सड़कों पर उतर आए। शुरू में शांतिपूर्ण रहे प्रदर्शन जल्द ही उग्र हो गए और भीड़ संसद भवन तक पहुँच गई।
प्रदर्शनकारियों ने बैन वापस लेने और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए नारेबाजी की। हालात बिगड़ते देख सरकार ने काठमांडू, भैरहवा, बुटवल और आसपास के कई क्षेत्रों में कर्फ्यू लागू कर दिया है। राजधानी में सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई है। कई इलाकों में इंटरनेट सेवा भी बाधित कर दी गई है ताकि विरोध को फैलने से रोका जा सके।
सीमा पर बढ़ाई गई चौकसी, हर गतिविधि पर नजर
नेपाल में उभरती अस्थिरता को देखते हुए भारत ने भी अपनी तैयारियाँ तेज कर दी हैं। खासतौर पर उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले से सटी भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हो गई हैं।
एसएसबी (सशस्त्र सीमा बल) और स्थानीय पुलिस ने सीमा क्षेत्र में गश्त तेज कर दी है। नेपाल से भारत में प्रवेश करने वालों की सघन तलाशी की जा रही है और सीसीटीवी कैमरों के जरिए हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।
भारत सरकार की कड़ी नजर, हर स्थिति से निपटने की तैयारी
भारत सरकार की ओर से भी नेपाल की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। खुफिया एजेंसियों को अलर्ट किया गया है और सीमा पर शांति व कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष निगरानी की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि नेपाल की आंतरिक स्थिति का असर सीमा पार न हो और किसी प्रकार की अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सके।
पृष्ठभूमि: क्यों हुआ सोशल मीडिया बैन?
नेपाल सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया एप्स पर भ्रामक सूचनाओं, अफवाहों और देशविरोधी गतिविधियों में वृद्धि हो रही थी, जिसके चलते यह कदम उठाया गया। बैन किए गए एप्स में कुछ प्रमुख अंतरराष्ट्रीय एप्लिकेशन भी शामिल हैं। हालांकि, सरकार के इस कदम की चौतरफा आलोचना हो रही है और इसे लोकतंत्र के खिलाफ बताया जा रहा है।