लखनऊ संदेश महल समाचार
उत्तर प्रदेश सरकार ने आलू उत्पादक किसानों को राहत देने और सरकारी योजनाओं का पारदर्शी तरीके से लाभ पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने उद्यान भवन, सप्रू मार्ग, लखनऊ में आलू किसानों के लिए नव विकसित ऑनलाइन पोर्टल का शुभारंभ किया।
आलू उत्पादकों को योजनाओं का लाभ आसानी से उपलब्ध कराने के लिए विभाग द्वारा https://potato.uphorticulture.in/ पोर्टल विकसित किया गया है। सरकार ने आलू किसानों को बाजार मूल्य में गिरावट, भंडारण लागत और गुणवत्तापूर्ण बीज की बढ़ती लागत से होने वाले नुकसान से राहत देने के लिए तीन प्रमुख योजनाएं शुरू की हैं।
इन योजनाओं में 1000 करोड़ रुपये का भामाशाह भाव स्थिरता कोष, निजी कोल्ड स्टोरेज में रखे आलू पर भंडारण शुल्क में सहायता तथा आलू के बीज की बिक्री दर पर छूट शामिल है। आलू की उत्पादन लागत निर्धारित करने के लिए कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में समिति गठित की जाएगी।
सरकार की योजना के तहत किसानों को निर्धारित उत्पादन लागत के 25 प्रतिशत के बराबर अथवा उत्पादन लागत और बिक्री मूल्य के बीच के अंतर के बराबर सब्सिडी दी जाएगी। इसमें जो राशि कम होगी, उसी के आधार पर सहायता प्रदान की जाएगी।
इसके अलावा निजी कोल्ड स्टोरेज में रखे आलू के लिए किसानों को 100 रुपये प्रति क्विंटल तक की सब्सिडी मिलेगी। एक किसान को अधिकतम 20 हजार रुपये तक की भंडारण सहायता दी जाएगी।
वहीं, किसानों को बेहतर और उच्च गुणवत्ता वाले आलू के बीज उपलब्ध कराने के लिए बीज बिक्री दर पर छूट की व्यवस्था की गई है। विभाग के आधार बीज की खरीद पर किसानों को अधिकतम 1000 रुपये प्रति क्विंटल तक की छूट मिलेगी।
सरकार का कहना है कि इन योजनाओं का उद्देश्य आलू किसानों को उत्पादन के बाद आने वाली आर्थिक चुनौतियों से राहत देना और उन्हें बेहतर बाजार एवं कृषि सुविधाएं उपलब्ध कराना है। ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता आने के साथ किसानों को आवेदन और योजना संबंधी जानकारी प्राप्त करने में भी सुविधा होगी।