महादेवा इको पर्यटन क्षेत्र के समीप प्रतिबंधित गूलर के तीन विशालकाय पेड़ों पर चला आरा वन विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल

गूलर के पेड़ों की अवैध कटान

सूरतगंज,बाराबंकी संदेश महल
फतेहपुर वन रेंज अंतर्गत विकासखंड सूरतगंज क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण के दावों को चुनौती देने वाला एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। महादेवा इको पर्यटन गार्डन पार्क एवं भगहर झील से महज दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम पिपरी महार के निकट प्रतिबंधित प्रजाति के तीन विशालकाय हरे-भरे गूलर के पेड़ों को कथित रूप से काटकर ठिकाने लगा दिया गया। आरोप है कि पेड़ों की लकड़ी को भी बेच दिया गया है, जिससे क्षेत्र में वन माफियाओं की सक्रियता और वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार मुख्य सड़क से कुछ ही दूरी पर स्थित इन पेड़ों की कटान बिना किसी संरक्षण या मिलीभगत के संभव नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से प्रतिबंधित एवं पुराने वृक्षों की अवैध कटान का सिलसिला जारी है, लेकिन जिम्मेदार विभाग प्रभावी कार्रवाई करने में विफल साबित हो रहा है। यही कारण है कि वन माफियाओं के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं और उनका अवैध कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है।
पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि एक ओर सरकार हरित आवरण बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर दशकों पुराने विशाल वृक्षों को काटकर प्राकृतिक संतुलन से खिलवाड़ किया जा रहा है। इससे न केवल जैव विविधता प्रभावित हो रही है, बल्कि क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण और गर्मी के बीच लोगों को स्वच्छ वातावरण एवं पर्याप्त ऑक्सीजन जैसी मूलभूत आवश्यकताओं के संकट का भी सामना करना पड़ सकता है।
सूत्रों की मानें तो फतेहपुर वन क्षेत्र में प्रतिबंधित वृक्षों की अवैध कटान कोई नई बात नहीं है। समय-समय पर ऐसे मामले सामने आते रहे हैं, जिनमें वनकर्मियों और लकड़ी कारोबारियों की कथित सांठगांठ की चर्चाएं भी होती रही हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन हालिया घटना ने एक बार फिर पूरे तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
इस संबंध में वन क्षेत्राधिकारी प्रमोद सिंह ने बताया कि मामला संज्ञान में आने के बाद उच्चाधिकारियों के निर्देश पर जांच टीम गठित कर दी गई है। वन विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर पूरे प्रकरण की जांच करेगी तथा दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
वहीं जिला वन अधिकारी आकाशदीप बाघवान ने कहा कि मामले को गंभीरता से लिया गया है। निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और यदि अवैध कटान की पुष्टि होती है तो संबंधित ठेकेदारों एवं अन्य दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। अब बड़ा सवाल यह है कि महादेवा इको पर्यटन क्षेत्र के निकट प्रतिबंधित गूलर के तीन विशालकाय पेड़ों की कटान आखिर किसके संरक्षण में हुई? क्या जांच के बाद जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा? क्षेत्रीय जनता अब इस सवाल का जवाब और दोषियों पर ठोस कार्रवाई का इंतजार कर रही है।