नई दिल्ली संदेश महल समाचार
सुप्रीम कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि किसी सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसकी शादीशुदा बेटी को केवल वैवाहिक स्थिति के आधार पर नौकरी के लिए अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पुत्र और पुत्री के बीच भेदभाव संविधान की समानता की भावना के विपरीत है।
सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि यदि किसी परिवार को कर्मचारी की मृत्यु के बाद आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है, तो शादीशुदा बेटी भी अनुकंपा नियुक्ति के लिए उतनी ही पात्र है जितना कि परिवार का अन्य आश्रित सदस्य। केवल यह तथ्य कि बेटी का विवाह हो चुका है, उसे इस अधिकार से वंचित करने का आधार नहीं बन सकता।
न्यायालय ने कहा कि समय के साथ सामाजिक परिस्थितियां बदली हैं और बेटियां भी अपने माता-पिता तथा परिवार की जिम्मेदारियां निभा रही हैं। ऐसे में अनुकंपा नियुक्ति संबंधी नियमों में लैंगिक समानता सुनिश्चित करना आवश्यक है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, इस फैसले का देशभर में हजारों मामलों पर प्रभाव पड़ सकता है, जहां शादीशुदा बेटियों को अनुकंपा नियुक्ति से वंचित किया गया था। न्यायालय के इस निर्णय को महिलाओं के अधिकारों और समान अवसरों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से उन परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो कर्मचारी की मृत्यु के बाद आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं और जिनकी शादीशुदा बेटियां परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।